पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग का काम शुरू, BSF को मिली 27 किलोमीटर जमीन

एक स्थानीय व्यक्ति ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि, "हमने सीमा पर फेंसिंग की माँग की थी, लेकिन किसी वजह से ऐसा नहीं हो पाया था। अब, शुभेंदु अधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद, 10 दिनों के भीतर ही BSF को पूरी छूट दे दी गई है। हम सभी गाँव वाले खुशी से झूम रहे हैं। उन्हें ऐसा लग रहा है कि अब वे खुलकर साँस ले सकते हैं।"

पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग का काम शुरू, BSF को मिली 27 किलोमीटर जमीन

इस कदम से BSF को घुसपैठ और तस्करी रोकने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

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Highlights

  • मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली सरकार पर तुष्टीकरण के कारण BSF को जमीन न देने का आरोप लगाया।
  • बॉर्डर पर फेंसिंग का काम शुरू होने के बाद आस-पास रहने वाले लोगों में खुशी और सुरक्षा का माहौल है।
  • जांगीपुर से विधायक चित्त मुखर्जी ने कहा की हमारी सरकार तस्करी और घुसपैठ के प्रति जीरो टॉलरेंस रखती है।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी सब-डिवीजन के अंतर्गत आने वाले फांसिदेवा इलाके में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फेंसिंग का काम शुरू हो गया है। इस कदम से बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को घुसपैठ और तस्करी रोकने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने सीमा पर फेंसिंग के लिए 27 किलोमीटर जमीन BSF को सौंप दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कह चुके हैं कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए फेंसिंग का काम तेजी से पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने पिछली सरकार पर "वोट-बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण" के कारण BSF को जमीन न देने का भी आरोप लगाया।

इतना महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने के बाद वहां रहने वाले लोगों ने भी राहत की सांस ली है। एक स्थानीय व्यक्ति ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, "यह एक सीमावर्ती इलाका है, जहाँ पहले कोई सुरक्षा नहीं थी। यहाँ का माहौल पहले इतना खौफनाक था कि मैं उसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता। पहले तो हम यहाँ गायें भी नहीं पाल सकते थे। गायें पालना, बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के सामने खुद को सौंप देने जैसा था। यह न सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए सुरक्षा का मामला था। आज हमें लगता है कि नई सरकार और नए मुख्यमंत्री के प्रयासों की बदौलत, हम सुरक्षित हैं।"

एक और व्यक्ति ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि, "हम गाँव की सफलता और समृद्धि के लिए इस सरकार को बधाई देते हैं, क्योंकि सीमावर्ती इलाके में रहने वाले हम लोगों को अब कई मुश्किलों से राहत मिली है। हमने सीमा पर फेंसिंग की माँग की थी, लेकिन किसी वजह से ऐसा नहीं हो पाया था। अब, शुभेंदु अधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद, 10 दिनों के भीतर ही BSF को पूरी छूट दे दी गई है। हम सभी गाँव वाले खुशी से झूम रहे हैं। गाँव वाले बहुत खुश हैं। उन्हें ऐसा लग रहा है कि अब वे खुलकर साँस ले सकते हैं। हम चैन से सो सकते हैं।" 

एक अन्य व्यक्ति ने भी संतोष जताते हुए बताया, "यह बहुत खुशी की बात है। सरकार ने BSF को जो 27 किलोमीटर जमीन दी है, उससे हमें राहत मिली है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। हमने कई बार इसकी गुजारिश की थी, लेकिन हमें बताया गया था कि पिछली राज्य सरकार जमीन नहीं दे रही थी।" मुर्शिदाबाद जिले की जांगीपुर सीट से विधायक चित्त मुखर्जी ने इस पूरे मुद्दे पर कहा कि, सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर जमीन खाली पड़ी है और फेंसिंग न होने के कारण भारत को काफी नुकसान भी हुआ है। हमारी सरकार तस्करी और घुसपैठ के प्रति जीरो टॉलरेंस रखती है और इसे पूरी तरह रोका जाना चाहिए। 

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