साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स 20 से 23 मई तक भारत के दौरे पर हैं। उनके साथ एक हाई-लेवल डेलिगेशन भी है, जिसमें विदेश मंत्री डॉ. कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस, परिवहन, संचार और कार्य मंत्री एलेक्सिस वाफेएड्स, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापार जगत के लीडर्स भी शामिल हैं।
आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स के बीच डेलिगेशन-लेवल पर बातचीत हुई। एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक पहुँचा दिया है।
X पर इसकी जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने लिखा, "प्रधानमंत्री मोदी ने आज नई दिल्ली में साइप्रस के राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ विस्तृत चर्चा की। इस चर्चा में ट्रेड और इन्वेस्टमेंट, रक्षा और सुरक्षा, मैरीटाइम और फाइनेंशियल कनेक्टिविटी, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, मोबिलिटी, शिक्षा, संस्कृति और भारत-EU इंगेजमेंट जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया।
उन्होंने आगे लिखा, "दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। दोनों नेताओं ने क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म समेत सभी तरह के आतंकवाद से लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं की मौजूदगी में कई समझौतों का आदान-प्रदान भी हुआ, जिनमें काउंटर-टेररिज्म, मैरीटाइम सिक्योरिटी, डिप्लोमैटिक ट्रेनिंग, इनोवेशन, शिक्षा और संस्कृति आदि शामिल हैं।"
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स ने मिलकर एक जॉइंट प्रेस मीट को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज दोनों देश अपनी पार्टनरशिप को स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में बदल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि साइप्रस भारत के टॉप 10 इन्वेस्टर्स में से एक है। पिछले एक दशक में, भारत में साइप्रस से होने वाला निवेश लगभग डबल हुआ है। भारत-EU FTA ने नई संभावनाएं खोली हैं। हमारा लक्ष्य अगले 5 वर्षों में इस इन्वेस्टमेंट को फिर से डबल करना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साइप्रस के साथ हमारा रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी बढ़ा है। हमने साइबर सिक्योरिटी, मैरिटाइम सिक्योरिटी और काउंटर-टेररिज्म के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने आगे बताया कि, अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए, हमने एक माइग्रेशन और मोबिलिटी एग्रीमेंट तथा सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट पर भी सहमति बनाई है। हम उच्च शिक्षा और संस्कृति पर भी समझौते कर रहे हैं।
दोनों देशों के बीच वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि चाहे यूक्रेन हो या वेस्ट एशिया, हम संघर्षों के शीघ्र समाप्ति और शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे। हम इस बात पर भी एकमत हैं कि बढ़ते ग्लोबल चैलेंजेज़ को हल करने के लिए ग्लोबल इंस्टीट्यूशंस में रिफॉर्म अत्यंत आवश्यक और महत्वपूर्ण है।