आमचूर पाउडर, गरम मसाले को ड्रग्स समझने पर जेल भेजे गए शख्स को मिलेगा 10 लाख रूपए मुआवजा

ये पूरा मामला मई 2010 का है। जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर के रहने वाले अजय सिंह भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से दिल्ली जा रहे थे। सुरक्षा जांच के दौरान, जब उनके सामान को एक्सप्लोसिव्स ट्रेस डिटेक्टर (ETD) मशीन से निकाला गया, तो अचानक मशीन का अलार्म बज उठा।

आमचूर पाउडर, गरम मसाले को ड्रग्स समझने पर जेल भेजे गए शख्स को मिलेगा 10 लाख रूपए मुआवजा

भोपाल एयरपोर्ट के सुरक्षाकर्मियों ने आमचूर पाउडर को ड्रग्स समझ लिया था।

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Highlights

  • फॉरेंसिक जांच में पाउडर अथवा मसाले में कोई भी प्रतिबंधित पदार्थ नहीं मिला।
  • गलत अलार्म देने वाली ETD मशीन के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए।
  • हाई कोर्ट ने 3 महीने के भीतर 10 लाख रूपए मुआवजा देने का निर्देश दिया।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बेहद अनोखे और हैरान कर देने वाले मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वो एक ऐसे व्यक्ति को 10 लाख रूपए मुआवजा दे, जिसे 16 साल पहले सिर्फ इसलिए जेल भेज दिया गया, क्योंकि भोपाल एयरपोर्ट पर सुरक्षा मशीन ने उसके बैग में रखे आमचूर पाउडर और गरम मसाले को खतरनाक ड्रग्स समझ लिया था। इस गलती के कारण उस निर्दोष व्यक्ति को 57 दिन जेल में बिताने पड़े थे। ये पूरा मामला मई 2010 का है। जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर के रहने वाले अजय सिंह भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से दिल्ली जा रहे थे। सुरक्षा जांच के दौरान, जब उनके सामान को एक्सप्लोसिव्स ट्रेस डिटेक्टर (ETD) मशीन से निकाला गया, तो अचानक मशीन का अलार्म बज उठा।

वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने बिना किसी ठोस जांच, अजय को ड्रग्स तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। अजय सिंह के वकील अजय गुप्ता ने बताया कि, "जब्त किए गए पाउडर को भोपाल की रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (RFSL) भेजा गया था, जहां जांच करने के लिए जरूरी उपकरण मौजूद नहीं थे। 10 दिन बाद, सैंपल्स को हैदराबाद स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) भेजा गया। 30 जून 2010 को CFSL ने साफ किया की कि उनमें कोई भी प्रतिबंधित पदार्थ मौजूद नहीं था।" अजय को 2 जुलाई 2010 को जमानत पर रिहा कर दिया गया, लेकिन जेल में लगभग 2 महीने बिताने के बाद।

इसके बाद अजय सिंह ने हाई कोर्ट का रूख कर, इस घटना के कारण हुई मानसिक पीड़ा और प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की। हाई कोर्ट के सामने उन्होंने दलील दी कि ETD मशीन भारतीय हालातों के लिए सही नहीं थी और उसने भारतीय मसालों को गलत तरीके से नारकोटिक सब्सटेंस के तौर पर पहचाना था। उन्होंने यह भी बताया कि गरम मसाला और आमचूर के अन्य ब्रांडों पर किए गए बाद के टेस्ट्स में भी इसी तरह के झूठे अलार्म बजे थे। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक खोट ने सिंह की हिरासत को उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। इसके बाद राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि 3 महीने के भीतर अजय सिंह को 10 लाख रूपए का मुआवजा दिया जाए। 

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