जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए आज 5 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इन कर्मचारियों पर आरोप है कि ये आतंकी संगठनों से जुड़े हुए थे और चुपचाप देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आर्टिकल 311 (2) (C) के तहत उन्हें बर्खास्त करने का आदेश दिया। आर्टिकल 311 (2) (C) के तहत सरकार को ये अधिकार है कि अगर किसी कर्मचारी की गतिविधियां देश/राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, तो उसे बिना किसी लंबी जांच के बाहर निकाला जा सकता है।
जिन 5 लोगों पर गाज गिरी, वे सभी अलग-अलग डिपार्टमेंट्स में तैनात थे। इनमें शिक्षक, लैब टेक्नीशियन, असिस्टेंट लाइनमैन, स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर और वन विभाग का एक कर्मचारी शामिल है। ये लोग जनता के पैसों से वेतन ले रहे थे और ओवरग्राउंड वर्कर्स के रूप में आतंकियों के लिए काम कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, बर्खास्त किए गए शिक्षक मोहम्मद अशफाक के तार लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े बताए गए हैं। यहां तक कि एक पुलिस अधिकारी की हत्या की साजिश में भी उसका नाम आया था। लैब टेक्नीशियन तारिक अहमद राह के बारे में बताया जा रहा है कि वो हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन (HM) से संपर्क में था और उसने एक आतंकवादी को पाकिस्तान भागने में मदद की थी।
इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ आतंकवादियों, खासकर पाकिस्तान में रहने वाले HM आतंकी बशीर अहमद भट्ट के साथ संपर्क में था। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद को पालने या उसे किसी भी तरह की मदद देने वालों का यहां कोई स्थान नहीं है। एक अधिकारी ने कहा, "इस कदम का मकसद आतंकी इकोसिस्टम की जड़ों और सरकारी मशीनरी के अंदर उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना है।" पिछले कुछ समय में ऐसे करीब 85 लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है, जो किसी न किसी तरह की संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे।