पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया और दिलचस्प मोड़ आ गया है, जिसने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गुट को तगड़ा झटका दिया है। नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान (डे) ने अचानक अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। संचिता ने यह फैसला राज्य सचिवालय 'नबान्न' में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद लिया। इससे पहले, आज ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने इस गुट को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (MAITC) नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चुनाव चिह्न आवंटित किया था। संचिता के पीछे हटने से ममता गुट की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं।
नामांकन दाखिल करने की समय-सीमा 16 सितंबर को ही समाप्त हो चुकी है, जिसके कारण पार्टी अब इस सीट पर कोई नया उम्मीदवार भी नहीं उतार पाएगी। इस सीट के लिए मुकाबला अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की हासिरानी रथ, अरूप रॉय के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (DTC) के एहतेशामुल हक, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के शांति गोपाल गिरी और कांग्रेस के मिलन प्रधान के बीच है। ECI से नया नाम और चुनाव चिह्न मिलने के बाद ममता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। उन्होंने कहा कि हम नंदीग्राम और असम में कांग्रेस को अपना समर्थन दे रहे हैं। हम देश के व्यापक हित में ऐसा कर रहे हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि हम अपना सिर नहीं झुकाएंगे। हम कभी भी पार्टी के उन पक्षपाती राजनीतिक लोगों के सामने अपना सिर नहीं झुकाएंगे जो यह सब गड़बड़ कर रहे हैं। हम लड़ाई लड़ेंगे और वापसी करेंगे। उन्होंने BJP पर आरोप लगाया कि BJP का काम देश में लोकतंत्र, संविधान और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करना है। उन्होंने उद्धव ठाकरे का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी पहले ऐसी ही परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। ममता ने में कहा कि वे ऐसे किसी भी व्यक्ति का सम्मान नहीं करतीं, जो केवल BJP के अहंकार को संतुष्ट करने में जुटे हैं।