क्या पंजाब में 2027 में फिर साथ आएंगे भाजपा और अकाली दल? अटकलों का बाजार गर्म

गठबंधन के मुद्दे पर पंजाब BJP के उपाध्यक्ष फतेहजंग सिंह बाजवा ने कहा कि यह मामला पार्टी हाई कमान के हाथ में है। उन्होंने बताया कि पार्टी हाई कमान ने तय किया है कि BJP सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और वे इसके लिए तैयार हैं। गठबंधन होगा या नहीं, इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

क्या पंजाब में 2027 में फिर साथ आएंगे भाजपा और अकाली दल? अटकलों का बाजार गर्म

अगर हम इतिहास पर नजर डालें तो भाजपा और SAD के बीच गठबंधन 1996 से 2020 तक चला।

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Highlights

  • कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी से सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद इन अटकलों को और बल मिला है।
  • रिपोर्ट्स की मानें तो भाजपा ने साफ कर दिया है की कोई भी गठबंधन तभी होगा जब पार्टी की भूमिका बड़े भाई की होगी।
  • बिक्रम सिंह मजीठिया के मुताबिक पंजाब में विकास की स्थिति को लेकर लोग चाहते है की दोनों पार्टियां साथ आएं।

भारत के एक अहम सीमावर्ती राज्य, पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों को देखते हुए राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बीच, केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और पंजाब की एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ दिन पहले ही, पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिससे इन अटकलों को और बल मिला है। ये चर्चाएं तब और तेज हो गईं, जब लोकसभा सांसद हरसिमरत कौर बादल ने संगरूर जिले के लोंगोवाल में एक कार्यक्रम के दौरान BJP का नाम लिए बिना दिल्ली के साथ भविष्य में किसी संभावित "समझौते" का जिक्र किया।

इसके बाद उन्होंने केंद्र के साथ राजनीतिक समझौतों के महत्व पर जोर दिया और याद दिलाया कि अतीत में ऐसे समझौतों से पंजाब को कितना विकास और तरक्की मिली थी। हरसिमरत ने कहा कि गुरू साहिब हमें अपना आशीर्वाद दें। वे लोगों को शक्ति दें और ऐसे समझौते हों ताकि आपकी तरक्की और विकास के प्रोजेक्ट दिल्ली के जरिए पूरे हो सकें और एक बार फिर पंजाब के विकास की नींव रखी जाए, जिससे लोगों और पंजाब दोनों को फायदा हो। हालांकि, गठबंधन के मुद्दे पर उन्होंने कोई साफ जवाब नहीं दिया। हरसिमरत ने कहा कि इस बारे में बोलना उनका काम नहीं है और समय आने पर सब कुछ जनता के सामने आ जाएगा।

पंजाब सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हरसिमरत कौर बादल जी ने एक संकेत दिया है, जो मुझे लगता है कि लोग भी यही चाहते हैं। वाजपेयी साहब और बादल साहब के बीच भाईचारे, सांप्रदायिक सद्भाव और हिंदू-सिख एकता पर आधारित एक मजबूत गठबंधन था और वह गठबंधन पंजाब और केंद्र, दोनों जगह सफल रहा। कृषि कानूनों के बाद हमारे रास्ते अलग हो गए थे। यह सब एक सच्चाई है। यह इतिहास में दर्ज है। आज, लोग मांग कर रहे हैं कि पंजाब में बॉर्डर, लॉ एंड ऑर्डर, अन्य मुद्दों, विकास और रोजगार की स्थिति को देखते हुए, हमें एक साथ आना चाहिए।

गठबंधन के मुद्दे पर पंजाब BJP के उपाध्यक्ष फतेहजंग सिंह बाजवा ने कहा कि यह मामला पार्टी हाई कमान के हाथ में है। उन्होंने बताया कि पार्टी हाई कमान ने तय किया है कि BJP सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और वे इसके लिए तैयार हैं। गठबंधन होगा या नहीं, इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा। रिपोर्ट्स की मानें तो, BJP ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी गठबंधन तभी होगा जब पार्टी की भूमिका 'बड़े भाई' की होगी। अगर हम इतिहास पर नजर डालें, तो BJP और SAD के बीच गठबंधन 1996 से 2020 तक, यानी लगभग 24 साल तक चला। 

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की कैबिनेट में कुछ BJP नेताओं ने मंत्री के तौर पर काम किया और गठबंधन के दौरान BJP नेताओं ने पंजाब विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद भी संभाला। 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई, हालांकि उसका वोट शेयर 1.2 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी, फिर भी उसका वोट शेयर बढ़कर 18.56 प्रतिशत हो गया, जो SAD के 13.42 प्रतिशत से ज्यादा था। स्थिति तभी साफ होगी जब दोनों पार्टियां आधिकारिक घोषणा करेंगी।

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