भारत के राज्य ओडिशा के कई जिले इन दिनों बाढ़ से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भद्रक, जाजपुर, बालासोर, केंद्रपाड़ा और केंदुझार जैसे जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। बताया जा रहा है कि राज्य में 7 से 9 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इस सिलसिले में, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कई जानकारियां दीं।
मुख्यमंत्री माझी ने बताया कि कल मैंने जाजपुर और भद्रक जिलों में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए सड़क मार्ग से यात्रा की। इस जिले में कुल 10 ब्लॉक, 270 गांव और एक शहरी इलाका प्रभावित हुआ है। हमारे विभाग ने 2 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया। कुल 77,680 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया और वहां 291 राहत कैंप लगाए गए हैं। इसके अलावा, भद्रक जिले में भी चार ब्लॉक प्रभावित हुए हैं, जिनमें 134 गांव और एक शहरी इलाका शामिल है।
यहां 1,96,240 लोग बाढ़ से पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। इन दो जिलों के अलावा, चार अन्य जिले, बालासोर, मयूरभंज और केंद्रपाड़ा भी प्रभावित हुए हैं, जिससे प्रभावित जिलों की कुल संख्या 6 हो गई है। बालेश्वर और भद्रक को कई बार बाढ़ का सामना करना पड़ा है। बचाव कार्यों के लिए हमने NDRF की 39 टीमें और फायर सर्विस की 51 यूनिट्स पूरी तरह तैनात की हैं। हमने 2-3 किस्तों में 136 करोड़ रूपए की आर्थिक मदद भी दी है। हालाँकि स्थिति अभी भी गंभीर है, लेकिन जमीनी हालात और मिली रिपोर्ट्स के आधार पर हम पाबंदियों में कुछ ढील देने के लिए कदम उठा रहे हैं।
एक बहुत ही अहम घोषणा में, मुख्यमंत्री माझी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए 1 हजार करोड़ रूपए के एक पैकेज का ऐलान किया। सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिखा कि छोटे और सीमांत किसान जिनकी फसलें 33% या उससे ज्यादा खराब हुई हैं, उन्हें खेती के लिए इनपुट सब्सिडी दी जाएगी। बिना सिंचाई वाली जमीन के लिए 8,500 रूपए प्रति हेक्टेयर, सिंचाई वाली जमीन के लिए 17,000 रूपए प्रति हेक्टेयर और वार्षिक फसलों के लिए 22,500 रूपए प्रति हेक्टेयर तक।
प्रभावित किसानों को बीज के लिए आर्थिक मदद,मुफ्त वेजिटेबल मिनी-किट और कीटों से फसल को हुए नुकसान के लिए 75 प्रतिशत सब्सिडी भी मिलेगी। खराब हुई सिंचाई परियोजनाओं की बहाली और मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा। मछुआरों और किसानों को खराब हुई नावों, जालों और तालाबों की बहाली के लिए मदद दी जाएगी।
साथ ही पशुधन के नुकसान के लिए मुआवजा भी दिया जाएगा। इच्छुक किसानों के अल्पकालिक खरीफ कृषि ऋण को मध्यम अवधि के ऋण में बदला जाएगा। हैंडीक्राफ्ट्स और हैंडलूम क्षेत्र में खराब हुए औजारों और मशीनरी के लिए 5 हजार रूपए और कच्चे माल/तैयार माल के नुकसान के लिए 5 हजार रूपए की मदद दी जाएगी।
सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर की अस्थायी मरम्मत के साथ-साथ अंतिम आकलन के बाद स्थायी पुनर्निर्माण के लिए जरूरी फंड दिया जाएगा। हालात सामान्य होने तक पका हुआ खाना, सूखा राशन और राहत के तौर पर चावल दिए जाते रहेंगे। प्रभावित परिवारों को कपड़े और बर्तन खरीदने के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति को सामान्य करना और नागरिकों को पूरी मदद देना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतिम आकलन के बाद जरूरत के हिसाब से इस सहायता राशि को और बढ़ाया जा सकता है।