प्रधानमंत्री मोदी ने वडोदरा से दी 35,000 करोड़ की सौगात, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर समेत कई परियोजनाओं का आगाज

भारत अब मैन्युफैक्चरिंग की एक नई कहानी लिख रहा है, जिसमें 'चिप्स से लेकर शिप्स' तक सब कुछ शामिल है। इसका मतलब है कि कंपोनेंट्स और फाइनल प्रोडक्ट्स, दोनों ही हमारे अपने हैं। आत्मनिर्भरता के लिए पूरी सप्लाई चेन भारत में ही तैयार की जा रही है। हाल के वर्षों में हमने देश में ही फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल बनाना शुरू किया है। आज हमारी क्षमता 200 गीगावाट से ज्यादा हो गई है और इसी आत्मनिर्भरता ने 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' का रास्ता साफ किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने वडोदरा से दी 35,000 करोड़ की सौगात, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर समेत कई परियोजनाओं का आगाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित भी किया।

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Highlights

  • वडोदरा में 32.93 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले महानगरपालिका के नए कार्यालय का शिलान्यास भी किया गया।
  • प्रधानमंत्री मोदी का तंज, 2014 से बने 50,000 रेल कोच, पिछली सरकार 10 साल में 50,000 टॉयलेट भी न बना सकी।
  • भारत सरकार युवाओं को कृषि और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में AI में कुशल बनाने के लिए बड़ी पहल शुरू करने जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात और महाराष्ट्र के दौरे के दौरान वडोदरा को एक बड़ी सौगात दी। उन्होंने यहाँ 35,000 करोड़ रूपए से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान वडोदरा में आयोजित 'नमो फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम में उमड़े जनसैलाब ने प्रधानमंत्री का बेहद गर्मजोशी और जोरदार स्वागत किया। विभिन्न विकास परियोजनाओं में रेल मंत्रालय की 30,700 करोड़ रूपए से अधिक की तीन परियोजनाओं का शिलान्यास और 'डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर' समेत एक परियोजना का उद्घाटन शामिल है। 

वहीं, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत वडोदरा, भरूच, सूरत और दक्षिण गुजरात में 1,780.65 करोड़ की लागत से तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की नींव रखी गई। इसके अतिरिक्त, शहरी विकास और शहरी आवास विभाग के तहत वडोदरा में 90.16 करोड़ रूपए की जल निकासी व जलापूर्ति योजनाओं का लोकार्पण और 32.93 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले महानगरपालिका के नए कार्यालय का शिलान्यास भी किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित भी किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए जो न सिर्फ सुगम हो, बल्कि समय के साथ चलने के लिए काफी तेज भी हो। वडोदरा 'गति शक्ति यूनिवर्सिटी' का शहर है। आज यहीं से 'डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर' की अंतिम कड़ियाँ भी जुड़ गई हैं। 2,800 किलोमीटर से ज्यादा लंबा 'डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर' प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। 21वीं सदी के भारत के लिए एक सचमुच ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। 

यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इस बात का सबूत है कि पिछले 12 सालों में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विचार सबसे पहले 2004 में आया था। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 2006 में एक खास कंपनी बनाई गई थी। फिर भी, 2014 तक फाइलें बस इधर-उधर घूमती रहीं। वे एक टेबल से दूसरी टेबल तक ही जाती रहीं। विडंबना देखिए, इन फाइलों को भी डेडिकेटेड कॉरिडोर का फायदा नहीं मिला।

आज, 2,800 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का काम सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अब देश के व्यापार और कारोबार का आधार बन रहे हैं। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेजी से विकसित हो रहे भारत के लिए एक जीवन रेखा है। इसने देश के परिवहन क्षेत्र को बदल दिया है। पहले, मालगाड़ियाँ और यात्री ट्रेनें एक ही ट्रैक का इस्तेमाल करती थीं, जिससे यात्रा और माल ढुलाई दोनों की गति धीमी हो जाती थी। हालाँकि, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस स्थिति को बदल दिया है। 

आज, ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर पर रोजाना 430 से ज्यादा मालगाड़ियाँ चलती हैं। जो मालगाड़ी पहले 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में 6.5 घंटे लेती थी, वह अब वही दूरी आधे से भी कम समय में तय कर सकती है। ट्रक से आमतौर पर 30 घंटे लगने वाली यात्रा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर सिर्फ 10 से 12 घंटों में पूरी हो जाती है। नतीजतन, इस कॉरिडोर पर मालगाड़ियों के चलने से ट्रकों और ट्रेनों दोनों के लिए ईंधन की बचत होती है, माल ढुलाई की लागत कम होती है, समय बचता है और पर्यावरण को भी फायदा होता है।

हाल ही में, JNPT (मुंबई) से वडोदरा तक एक डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी चलाई गई, यानी ट्रेन में एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर रखकर ले जाया गया। इस एक ट्रिप में मुंबई से वडोदरा तक जितना सामान पहुँचाया गया, वह 250 से ज्यादा ट्रकों में ले जाए जाने वाले सामान के बराबर था। प्रधानमंत्री ने तंज कसते हुए कहा, "अभी जो नाराज फूफाजी है, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक ड्राइवरों का क्या होगा? ट्रक कहाँ जाएँगे? जिन्होंने ट्रक खरीदे हैं, उनका क्या होगा? फूफाजी को एक काम मिल गया।"

प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी देते हुए कहा कि 2014 से भारत ने लगभग 50,000 आधुनिक रेल कोच बनाए हैं। पिछली सरकार 10 साल में 50,000 टॉयलेट भी नहीं बना पाई थी। भारत अब मैन्युफैक्चरिंग की एक नई कहानी लिख रहा है, जिसमें 'चिप्स से लेकर शिप्स' तक सब कुछ शामिल है। इसका मतलब है कि कंपोनेंट्स और फाइनल प्रोडक्ट्स, दोनों ही हमारे अपने हैं।

आत्मनिर्भरता के लिए पूरी सप्लाई चेन भारत में ही तैयार की जा रही है। हाल के वर्षों में हमने देश में ही फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल बनाना शुरू किया है। आज हमारी क्षमता 200 गीगावाट से ज्यादा हो गई है और इसी आत्मनिर्भरता ने 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' का रास्ता साफ किया है।

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि 'झूठ की गूंज' से गुमराह करने वाले लोग हर चौराहे पर मिल जाएंगे, लेकिन भारत का युवा सच की हुंकार से आगे बढ़ता है, सच की हुंकार के साथ चलता है और सच की हुंकार के लिए चलता है। भारत के युवाओं के लिए AI में माहिर होना भी जरूरी है। हम चाहते हैं कि हमारी युवा पीढ़ी AI के लिए तैयार रहे। ऐसा नहीं है कि AI में कुशल लोगों की जरूरत सिर्फ IT सेक्टर तक ही सीमित है।

इस स्किल वाले लोग खेती के लिए नए AI सॉल्यूशन बना सकते हैं, हेल्थकेयर सेक्टर के लिए टेक्नोलॉजी विकसित कर सकते हैं, मैन्युफैक्चरिंग में प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकते हैं या रोबोटिक्स में स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि हमारे पास ऐसे युवा हों जो देश और दुनिया भर की इंडस्ट्रीज की जरूरतों को पूरा करने के लिए AI को समझें और उसका इस्तेमाल करें। सरकार इस दिशा में एक बड़ी पहल शुरू कर रही है।

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