प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा से रिटायर हो रहे सांसदों को दी भावभीनी विदाई

हाल ही में राज्यसभा में एक बहुत यादगार और भावुक क्षण देखने को मिला, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिटायर हो रहे सांसदों को विदाई दी। इस अवसर पर उनके शब्द सिर्फ राजनीतिक नहीं थे, बल्कि जीवन के अनुभवों और सीख से भी भरे हुए थे। राज्यसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "ये एक ऐसा अवसर है, जो हर दो साल में एक बार इस सदन में हमें भावुक क्षणों में सराबोर कर देता है।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा से रिटायर हो रहे सांसदों को दी भावभीनी विदाई

प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में सबको भावुक कर देने वाला भाषण दिया।

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Highlights

  • प्रधानमंत्री मोदी ने विदाई को भावुक और परंपरागत अवसर बताते हुए अनुभवों की अहमियत बताई।
  • राजनीति को निरंतर प्रक्रिया बताते हुए कहा, यहां कभी फुल स्टॉप नहीं लगता।
  • उन्होंने कहा कि राज्यसभा का 6 साल का कार्यकाल नीति-निर्माण के जरिए देशसेवा का मौका देता है।

हाल ही में राज्यसभा में एक बहुत यादगार और भावुक क्षण देखने को मिला, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिटायर हो रहे सांसदों को विदाई दी। इस अवसर पर उनके शब्द सिर्फ राजनीतिक नहीं थे, बल्कि जीवन के अनुभवों और सीख से भी भरे हुए थे। राज्यसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "ये एक ऐसा अवसर है, जो हर दो साल में एक बार इस सदन में हमें भावुक क्षणों में सराबोर कर देता है। सदन में कई विषयों पर चर्चा होती है, जिनमें से प्रत्येक का अपना महत्व होता है।  लेकिन जब ऐसा अवसर आता है, तो हम अपने उन सहयोगियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं जो एक विशेष उद्देश्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि कुछ सहकर्मी यहां से विदाई लेकर लौट रहे हैं, जबकि कुछ अपने अनुभवों का उपयोग सामाजिक जीवन में योगदान देने के लिए करेंगे। जो वापस नहीं लौटेंगे, विशेष रूप से ऐसे सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "राजनीति में कभी फुल स्टॉप नहीं लगता, ये एक निरंतर चलने वाली प्रकिया है। प्रधानमंत्री ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक इस सदन में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। इसके अलावा रामदास अठावले का उल्लेख करते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उनकी कमी सदन में महसूस नहीं होगी, क्योंकि वे अपने हास्य और बुद्धिमत्ता से लोगों का मनोरंजन करते रहेंगे।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हर दो साल में होने वाला यह विदाई समारोह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक परंपरा है, जिसमें अनुभव और सीख की विरासत आगे बढ़ती रहती है। नए सदस्यों को पुराने सदस्यों से सीखने का अवसर मिलता है, जिससे यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में 6 साल का कार्यकाल न केवल नीति-निर्माण के जरिए देश की सेवा करने का मौका देता है, बल्कि यह जीवन को समृद्ध करने वाला एक अमूल्य अनुभव भी है। सांसद जब अपने विचारों और क्षमताओं के साथ यहां आते हैं, तो उनके कार्यकाल के अंत तक अनुभव की शक्ति से ये गुण कई गुना बढ़ जाते हैं।

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