SIR विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार पर सियासत तेज, कांग्रेस ने घेरा, NDA नेताओं ने अलग रखी राय

कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री और BJP नेता सी. एन. अश्वथ नारायण ने कहा कि स्पष्टीकरण मांगने में कुछ भी गलत नहीं है। लोकतंत्र में हर नागरिक, हर राजनीतिक दल और हर जनप्रतिनिधि को सवाल पूछने और जवाब मांगने का पूरा अधिकार है। हमारे देश में SIR कोई नई बात नहीं है। यह 8वां या 10वां अवसर है जब ऐसा किया जा रहा है। इसका एकमात्र उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह साफ-सुथरा, पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है।

SIR विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार पर सियासत तेज, कांग्रेस ने घेरा, NDA नेताओं ने अलग रखी राय

भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

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Highlights

  • कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने की ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग।
  • एच. डी. कुमारस्वामी ने चुनाव आयोग के अंदर की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
  • सामिक भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की बात कही।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विवाद और गहराता जा रहा है। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच, कांग्रेस ने इस राजनीतिक गतिरोध में पूरी तरह से आक्रामक रुख अपना लिया है। इस मामले पर कांग्रेस के साथ कुछ अन्य विपक्षी दल एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स (NDA) में शामिल कुछ दलों की ओर से भी बयान सामने आए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक का कहना है कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि चुनाव आयोग के जरिए किए गए गलत कामों के लिए उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। वह समय जरूर आएगा और उनके ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

NDA के घटक दल जनता दल-सेक्यूलर (JD-S) के नेता और केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा कि किसी भी पार्टी या नेता की मांग अपनी जगह है, लेकिन चुनाव आयोग की जिम्मेदारी अहम है। जमीनी हकीकत क्या है? चुनाव आयोग के अंदर क्या चल रहा है? मीडिया में जो दिख रहा है और जो असल बात है, उसमें क्या फर्क है, यह इन सदस्यों को बताना चाहिए। क्योंकि यह एक अहम और स्वायत्त संस्था है, तो ऐसा क्यों हुआ? उन्हें इसकी सच्चाई मीडिया या देश को बतानी चाहिए। उनकी जिम्मेदारी ज्यादा है। यह कोई मामूली बात नहीं है। चेयरमैन समेत चुनाव आयोग के उन तीनों सदस्यों के बीच क्या समस्या है? क्या गड़बड़ है? जो भी बात है, उन्हें साफ-साफ बतानी चाहिए।

कल पश्चिम बंगाल BJP के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने भी एक दिलचस्प बयान दिया। उनके अनुसार, ज्ञानेश कुमार को कम से कम पद्म भूषण सम्मान मिलना चाहिए। पश्चिम बंगाल के लोग इस बात से खुश हैं कि इतने लंबे समय बाद डराने-धमकाने की कोशिशों को दूर रखा गया। हत्या की कोई घटना नहीं हुई और लोगों को असल में वोट डालने का मौका मिला। इसके अलावा, सीमा से सटे ऐसे राज्य में, ज्ञानेश कुमार ने वोटर लिस्ट से बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने की पहल की। ​​पश्चिम बंगाल के लोगों ने शायद ही कभी ऐसा चुनाव देखा हो। इसलिए, पश्चिम बंगाल की आम जनता ज्ञानेश कुमार का पूरा समर्थन करती है।

वहीं कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री और BJP नेता सी. एन. अश्वथ नारायण ने कहा कि स्पष्टीकरण मांगने में कुछ भी गलत नहीं है। लोकतंत्र में हर नागरिक, हर राजनीतिक दल और हर जनप्रतिनिधि को सवाल पूछने और जवाब मांगने का पूरा अधिकार है। हमारे देश में SIR कोई नई बात नहीं है। यह 8वां या 10वां अवसर है जब ऐसा किया जा रहा है। इसका एकमात्र उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह साफ-सुथरा, पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है।

लोकसभा सांसद और कांग्रेस नेता सुखदेव भगत का कहना है कि देश का कामकाज और चुनाव प्रणाली चलाने वाला सिस्टम निष्पक्ष होना चाहिए। अगर वह सिस्टम पक्षपाती हो जाए और किसी खास पार्टी या सरकार के पक्ष में काम करे, तो यह संविधान का उल्लंघन है। मैंने कल देखा, BJP ने राज्य प्रभारियों की एक लिस्ट जारी की। मैं उस लिस्ट में ज्ञानेश कुमार का नाम ढूंढ रहा था, लेकिन वह उसमें नहीं था। फिर भी, मेरा मानना ​​है कि इसके लिए काला पानी की सजा होनी चाहिए। उनके पद, जिम्मेदारी और उनके गलत काम की गंभीरता को देखते हुए, मुझे लगता है कि काला पानी ही सही सजा है।​

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