भारत के राज्य गुजरात से एक बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा राज्य बन गया है, जिसे UCC के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि राष्ट्रपति ने आज UCC बिल को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। नतीजतन, गुजरात में अब UCC एक्ट लागू हो गया है। मैं इस UCC एक्ट का स्वागत करता हूँ, क्योंकि यह राज्य में महिलाओं के सशक्तिकरण और समानता के सिद्धांत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह एक्ट शादी, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार से जुड़े कई मुद्दों का समाधान करेगा, जो पहले विभिन्न समुदायों और धार्मिक समूहों में मौजूद थे। जब संविधान के निर्माताओं ने, जिनमें बाबासाहेब अंबेडकर और कई अन्य शामिल थे, संविधान का मसौदा तैयार किया था, तो उन्होंने देश में एक समान नागरिक संहिता की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया था। आज, गुजरात में वह उद्देश्य पूरा हो गया है। दूसरी तरफ, गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी (GPCC) के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि गुजरात में युवा बेरोजगार हैं और अक्सर परीक्षा के पेपर लीक हो जाते हैं। आदिवासी समुदाय जंगल और जमीन पर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।
SC और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार बढ़ रहे हैं। लोग महंगाई से परेशान है और किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सच तो यह है कि आज समाज का हर वर्ग और गुजरात का हर इलाका परेशान है। जब BJP सरकार ने विधानसभा में UCC बिल पेश किया, तो हमने बताया कि गुजरात में अलग-अलग समुदाय, जातियों और धर्मों के लोग रहते है, जिनकी अपनी-अपनी परंपराएँ, रीति-रिवाज और मान्यताएँ हैं और यह बिल उनके खिलाफ था। हमने कहा कि ऐसा बिल लाने से पहले इन सभी जातियों, समुदायों और धर्मों के लोगों से बातचीत होनी चाहिए थी, ताकि उनके सुझाव लिए जा सकें और चर्चा हो सके।
हमने विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस की और माँग की कि जब तक पूरे राज्य में ऐसी बातचीत न हो जाए, तब तक इस बिल को एक सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। लेकिन उन्होंने अपने बहुमत का इस्तेमाल करके बिल पास कर दिया। अब जब भारत के राष्ट्रपति ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, तो मेरा मानना है कि इससे किसी भी आदिवासी, दलित, OBC व्यक्ति या किसी भी गुजराती नागरिक को कोई फायदा नहीं होगा। यह सिर्फ सरकार की हर मोर्चे पर नाकामी से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है। इससे न तो गुजरात के लोगों को और न ही किसी एक गुजराती परिवार को कोई फायदा होगा।