प्रधानमंत्री मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में की शिरकत, कई बिजनेस लीडर्स और नीति-निर्माता भी आए नजर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने मानवता को सशक्त बनाने का रास्ता चुना है। हमने 100 से ज्यादा देशों को वैक्सीन सप्लाई कीं। हमारी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएँ भी दूसरे देशों के लिए मददगार साबित हुईं। कुछ महीने पहले, भारत ने AI इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। इस समिट में, मानवता के लिए AI के इस्तेमाल पर चर्चा करने के साथ-साथ, हमने इस बात पर भी चर्चा की कि जानवरों को AI से कैसे फायदा हो सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में की शिरकत, कई बिजनेस लीडर्स और नीति-निर्माता भी आए नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा की यह फोरम दुनिया के कुछ बेहतरीन दिमागों को एक साथ लाता है।

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Highlights

  • प्रधानमंत्री मोदी ने बताया की भारत में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है।
  • भारत ने नवंबर 2021 में ही नॉन-फॉसिल फ्यूल से 40% बिजली क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में शामिल हुए। यूनाइटेड किंगडम (UK) के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, ब्लूमबर्ग के सह-संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग और कई बिजनेस एवं इंडस्ट्री लीडर्स तथा नीति-निर्माताओं ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की। प्रधानमंत्री मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह फोरम दुनिया के कुछ बेहतरीन दिमागों को एक साथ लाता है। 

यहां इकोनॉमी, टेक्नोलॉजी, एनर्जी और ग्लोबल अफेयर्स पर विमर्श होता है। यह पहली बार है जब यह कार्यक्रम भारत में आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपलब्धि के लिए माइकल ब्लूमबर्ग और उनकी टीम को दिल से बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल के फोरम थीम दुनिया में उभर रही नई पावर्स पर केंद्रित है।

हर दौर में पावर के अपने स्रोत और परिभाषाएँ रही हैं। हालाँकि, 21वीं सदी में, खासकर इस तीसरे दशक में, एक बड़ा बदलाव आ रहा है। आज टेक्नोलॉजी पावर है, डेटा पावर है, ज्ञान पावर है और इनोवेशन पावर है। फिर भी, असली सवाल यह नहीं है कि यह पावर किसके पास है, बल्कि यह है कि इसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है। क्या टेक्नोलॉजी से सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों की तरक्की होगी, या करोड़ों लाखों लोगों के लिए नए मौके बनेंगे? 

क्या नॉलेज सिर्फ कुछ लोगों को ताकत बनेगी या इससे सभी की क्षमताएँ बढ़ेंगी? इससे एक नई सोच पैदा होती है यानी पावर टू एम्पावर। पावर टू कंट्रोल से आगे बढ़कर पावर टू इनेबल की ओर। पावर टू कम्पीट से आगे बढ़कर पावर टू कॉलेबोरेट की ओर। पावर टू सक्सीड से आगे बढ़कर पावर टू हेल्प अदर्स सक्सीड की ओर।

उन्होंने आगे कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। भारत में 100 से ज्यादा भाषाएँ, लगभग 80,000 रजिस्टर्ड अखबार और प्रकाशन और 1,000 से ज्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के इस दौर में भारत में 50 करोड़ से ज्यादा यूट्यूब यूजर्स और 50 करोड़ से ज्यादा इंस्टाग्राम यूजर्स हैं। हमारे देश में अलग-अलग मुद्दों पर खुली बहस होती है और लोग अलग-अलग नजरियों पर चर्चा करते हैं। 

हाल के समय में इसमें डिजिटल शक्ति ने अहम भूमिका निभाई है। 2014 में भारत में नई सरकार बनने और हमें सेवा करने का मौका मिलने के बाद, भारत ने मोबाइल डेटा को सस्ता बनाने पर ध्यान दिया। नतीजतन, आज छोटे शहर का कोई छात्र डिजिटल लर्निंग का लाभ उठा सकता है। गाँव का कोई छोटा दुकानदार नए ग्राहकों तक पहुँच सकता है। कोई युवा नए ऑनलाइन कोर्स में दाखिला ले सकता है।

हम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अपने अनुभव दूसरे देशों के साथ साझा कर रहे हैं ताकि वे अपनी जरूरतों के हिसाब से अपने डिजिटल सिस्टम विकसित कर सकें। कोविड-19 महामारी के दौरान, हमने कोविन प्लेटफॉर्म भी विकसित किया, जो ओपन सोर्स था। ये हमारी लगातार कोशिशें हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत की क्षमताएं दूसरे देशों के लिए भी संभावनाओं के नए दरवाजे खोलें। दूसरे शब्दों में, हमारी क्षमताओं से मानवता सशक्त होनी चाहिए।

इनोवेशन के मौके ज्यादा लोगों तक पहुँच रहे हैं। नया टैलेंट सामने आ रहा है और नए समाधान विकसित किए जा रहे हैं। दोस्तों, गवर्नेंस में सत्ता के मकसद पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है। सरकार के पास अधिकार तो होते हैं, लेकिन उसका मकसद नागरिकों को सिस्टम पर निर्भर बनाना नहीं होना चाहिए। बल्कि, उसका मकसद नागरिकों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए। भारत इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। पिछले दशक में, भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, जो कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है।

भारत ने मानवता को सशक्त बनाने का रास्ता चुना है। हमने 100 से ज्यादा देशों को वैक्सीन सप्लाई कीं। हमारी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएँ भी दूसरे देशों के लिए मददगार साबित हुईं। कुछ महीने पहले, भारत ने AI इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी, जिसकी मिस्टर ब्लूमबर्ग ने भी बहुत तारीफ की है। इस समिट में, मानवता के लिए AI के इस्तेमाल पर चर्चा करने के साथ-साथ, हमने इस बात पर भी चर्चा की कि जानवरों को AI से कैसे फायदा हो सकता है।

पेरिस समझौते के तहत, भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक बड़ा संकल्प लिया। 2015 में, हमने 2030 तक अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 40 प्रतिशत हिस्सा नॉन-फॉसिल फ्यूल सोर्सेज से हासिल करने का लक्ष्य रखा था। भारत ने नवंबर 2021 में ही यह उपलब्धि हासिल कर ली। सत्ता की वैश्विक दौड़ में भारत एक अलग रास्ता अपना रहा है और यह दशक इसका गवाह है। 21वीं सदी का यह दशक अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियां लेकर आया है। 

अगर हम पिछले छह वर्षों पर नजर डालें, तो हमने एक वैश्विक महामारी देखी है, जिसके बाद अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध छिड़ गए। इतना ही नहीं, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा की आपूर्ति में भी रुकावटें आई हैं। 21वीं सदी में भारत की प्रगति, सबके साथ मिलकर काम करने और सबको साथ लेकर चलने की कहानी है। जब दुनिया को सस्ती दवाओं की जरूरत होती है, तो हर पाँच में से एक जेनेरिक दवा भारत से आती है।

यह साफ है कि जब भी दुनिया को एक मजबूत सहारे की जरूरत होती है, भारत अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आगे आता है। हम किसी और का नुकसान करके आगे नहीं बढ़ते। हम दुनिया के साथ और दुनिया के लिए आगे बढ़ते हैं। भारत अपने कामों का श्रेय भी नहीं मांगता। दुनिया गर्व से मानती है कि भारत ने ही दुनिया को शून्य दिया। इस शून्य से पूरी मानवता को फायदा हुआ है, लेकिन भारत ने इसके लिए कभी कोई रॉयल्टी नहीं मांगी।

हमने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, बिग कैट अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) और मिशन लाइफ दिया है। भारत ने ऐसी पहल की हैं जिनसे सभी लोगों और हर जीव को फायदा होता है। आज हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ज्यादा है। हमारा बैंकिंग सिस्टम कई देशों के मुकाबले ज्यादा मजबूत स्थिति में है। यह मजबूती भारत की सॉवरेन रेटिंग में हुए सुधारों से झलकती है। आज भारत का आत्मविश्वास अभूतपूर्व स्तर पर है। हम स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ सुधार लागू कर रहे हैं।

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