रूस की फेडरल असेंबली के निचले सदन 'स्टेट ड्यूमा' के लिए 18 से 20 सितंबर के बीच हुए चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक और वैश्विक चर्चा का विषय बने हुए हैं। साल 2022 में यूक्रेन के साथ शुरू हुए सैन्य संघर्ष के बाद यह देश का पहला बड़ा संसदीय चुनाव है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन करने वाली सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी ने 450 में से 355 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जिसे करीब 57-58% वोट शेयर मिला है।
वहीं, 13.65% मतों और 38 सीटों के साथ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ द रशियन फेडरेशन (CPRF) दूसरे स्थान पर रही। अन्य दलों में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ रशिया (LDPR) को 22 सीटें और 8.96% वोट, न्यू पीपल (NL) पार्टी को 19 सीटें और 7.94% वोट और अ जस्ट रशिया (SR) पार्टी को 16 सीटें एवं 4.95% वोट हासिल हुए हैं। अब तक 97% से अधिक मतों की गणना हो चुकी है और अंतिम परिणाम आना बाकी है, इसलिए अंतिम आंकड़ों और सीटों की संख्या में आंशिक बदलाव देखने को मिल सकता है।
जानकारी के अनुसार, रूस की एकमात्र युद्ध-विरोधी विपक्षी पार्टी, रशियन यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी याब्लोको (RUDP Yabloko) को संसदीय चुनावों में हिस्सा लेने से रोक दिया गया। याब्लोको पर आरोप है कि उसे विदेश से फंडिंग मिलती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव से पहले राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने लोगों से अपील की कि वे यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन में वोट करें। उन्होंने कहा कि लोगों का वोट सैनिकों के प्रति समर्थन दिखाएगा। यह भी बताया जा रहा है कि निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षकों को इन चुनावों को देखने अथवा निगरानी करने की अनुमति नहीं दी गई थी।