लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधित विधेयक, 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी है। आज विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सदन में अपनी बात रखी। उन्होंने हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया। राहुल ने कहा कि मै बहुत उत्साहित था और इस देश के भविष्य को हमारी सड़कों पर जो भी करते देखा, उससे मुझे भरोसा मिला। ये गुस्सा, हिंसा या नफरत नहीं थी।
यह इस देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ी की भावनाओं का गहरा इजहार था। मुझे लगता है कि सभी राजनीतिक पार्टियों को, जिसमें BJP में मेरे दोस्त भी शामिल हैं, इस भावना का सम्मान करना चाहिए। मुझे पूरा यकीन है कि अगर BJP में मेरे दोस्त अपने ही बच्चों से पूछें कि उनके भाई-बहन जो कर रहे हैं, उसके बारे में वे क्या सोचते हैं, तो उन्हें अपने बच्चों का भी समर्थन ही मिलेगा। जो हुआ है उसमें कुछ भी गलत नहीं है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए।
लोकसभा में राहुल ने कुछ छात्राओं के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक छात्रा ने उनसे कहा कि एक स्टूडेंट वह होता है जिसका मन और दिमाग खुला हो। स्टूडेंट वह है जो शुरू से ही यह जानता है कि उसे सब कुछ नहीं पता। राहुल ने आगे कहा कि उस छात्रा ने एक और ग्रुप के बारे में भी बात की। एक ऐसा ग्रुप जो मानता है कि उसे सब कुछ पता है। उन्हें लगता है कि सारा ज्ञान उन्हीं के भीतर से आता है, वे खुद को भगवान मानते हैं। उन्हें लगता है कि एक इंसान के पास जितना ज्ञान होना चाहिए, वह सब उनके पास है। वे अहंकारी होते हैं और किसी की बात नहीं सुनते। वे दूसरों की सच्चाई का सम्मान नहीं करते। राहुल ने छात्रा से पूछा, "तुम उन्हें क्या कहती हो?" उसने जवाब दिया, "मैं उन्हें इडियट्स कहती हूँ।"
राहुल गांधी ने आगे बताया, "उसने कहा कि एक तरह का स्टूडेंट सच्चाई को गर्व के साथ दिखाता है। मैंने पूछा, दूसरी तरह के स्टूडेंट का क्या? उसने कहा कि दूसरी तरह के स्टूडेंट को एक इमेज की जरूरत होती है। उसे एक इमेज चाहिए होती है और चूंकि वह इमेज सच नहीं होती, क्योंकि वह बेवकूफ खुद को भगवान दिखाने की कोशिश कर रहा होता है, इसलिए उसे एक बहुत बड़ी इमेज बनानी पड़ती है। मैंने उससे एक सवाल पूछा कि तीसरी कैटेगरी कहां जाती है? यानी 'अंधभक्त' की कैटेगरी। उसने कहा, 'अंधभक्त' वह व्यक्ति है जिसे पूरा यकीन होता है कि कोई दूसरा बेवकूफ ही भगवान है।"
राहुल ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमारा सिस्टम बहुत खराब और क्रूर है। हर चीज का प्राइवेटाइजेशन किया जा रहा है। यह जबरन वसूली वाला सिस्टम है, यह बहुत बेरहम और बुरा सिस्टम है। इस सिस्टम की आत्मा पर RSS का कब्जा हो गया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि हम UPA नहीं हैं, हमारे मंत्री कभी इस्तीफा नहीं देते। उनकी बात सही है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ दिखावा है क्योंकि शिक्षा मंत्रालय कभी धर्मेंद्र प्रधान ने नहीं चलाया।
राहुल ने आगे कहा कि शिक्षा मंत्रालय को चलाने वाला संगठन RSS है। इसे चलाने वाला व्यक्ति मंत्री के ऑफिस में बैठा OSD है। तो, छात्र असल में इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत में छात्र बने रहने, अपने जुनून को फॉलो करने, अपनी बात कहने और अपने मन के सवाल पूछने की आजादी नहीं है। उन्हें RSS की मनगढ़ंत और बेतुकी हिस्ट्री को मानना पड़ता है। धर्मेंद्र प्रधान तो बस एक चेहरा हैं, असली दुश्मन RSS है। वे ही लोग हैं जो चाहते हैं कि आप 'अंधभक्त' बनें।
राहुल केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह पर भी हमलावर रहे। उन्होंने कहा कि आज मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि इस देश के तथाकथित गृह मंत्री में यहां आकर बैठने की हिम्मत नहीं है। मैंने उनका काफिला देखा और गृह मंत्री को कार के अंदर बैठे, देखते और कांपते हुए देखा। गृह मंत्री आज यहां क्यों नहीं हैं? क्योंकि वह डरे हुए हैं। राहुल ने दावा किया कि गृह मंत्री डरे हुए हैं, उन्होंने हमारे छात्रों पर गोली चलाने की इजाजत दी। उन्होंने हमारे छात्रों के शरीर में पेलेट्स घुसवाए, उन्होंने भारत के छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया। राहुल ने कहा कि बल प्रयोग की मंजूरी सिर्फ गृह मंत्री या प्रधानमंत्री ही दे सकते हैं।