करनाल और गाजियाबाद में लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा, अमित शाह-योगी ने कांग्रेस को घेरा

गाजियाबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपने पिछले कुछ समय में कांग्रेस द्वारा पैदा की गई अराजकता को देखा ही होगा। कैसे अपने स्वार्थ के लिए, वह दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र की विश्वसनीयता को कमजोर करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश कर रही है।

करनाल और गाजियाबाद में लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा, अमित शाह-योगी ने कांग्रेस को घेरा

अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न जनसभाओं को संबोधित किया।

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Highlights

  • अमित शाह ने कहा की संसद के भीतर हंगामा और बहिष्कार करना कांग्रेस की संस्कृति का हिस्सा बन गया है।
  • योगी आदित्यनाथ ने कहा की भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की आदत बन गई है।
  • योगी आदित्यनाथ ने कहा की 2014 से भारत सुरक्षित है और आतंकवाद तथा नक्सलवाद से मुक्त है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के देशव्यापी लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान के तहत आज हरियाणा के करनाल, राजस्थान के जयपुर और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पदयात्राएं निकाली गईं। करनाल में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, जयपुर में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और गाजियाबाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन पदयात्राओं का नेतृत्व किया। करनाल में अमित शाह के साथ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और BJP की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी समेत कई अन्य नेताओं ने पदयात्रा में भाग लिया।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि आज हमारी पार्टी BJP द्वारा आयोजित लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ रैली का आखिरी दिन है। 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक, यह रैली देश भर में विभिन्न पार्टी मुख्यालयों में आयोजित की गई। हर जगह, हमने एक जैसा उत्साह और भारी भीड़ देखी है। देश भर की सड़कों पर हमारे नेता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जनता का जबरदस्त समर्थन देखने को मिला है। 

उन्होंने आगे बताया कि BJP को ये रैलियां क्यों निकालनी पड़ी। देश की जनता ने लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री चुना है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को बार-बार हार का सामना करना पड़ा है। लोकतंत्र में, संसद चर्चा-विचार के लिए सबसे बड़ा मंच है, लेकिन राहुल गांधी न तो संसद की कार्यवाही चलने देते हैं और न ही अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं। संसद के भीतर हंगामा करना और बहिष्कार करना कांग्रेस की संस्कृति बन चुकी है।

संसद को काम नहीं करने देते, बल्कि सड़कों पर भीड़ जुटाकर अराजकता फैलाते हैं, एक अराजकतावादी की तरह बर्ताव करते हैं। अमित शाह ने आगे कहा, "राहुल गांधी, मैं आपको बता दूँ कि हम भी सड़कों से अनजान नहीं हैं। BJP आपको हर जगह जवाब देगी। संसद में, विधानसभाओं में, हमारे गांवों में, हमारे खेतों में और सड़कों पर भी। अगर आप भीड़ जुटाने पर अड़े रहे, तो BJP के कार्यकर्ता आपको मुंहतोड़ जवाब देने के लिए वहां मौजूद रहेंगे।

वहीं गाजियाबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आपने पिछले कुछ समय में कांग्रेस द्वारा पैदा की गई अराजकता को देखा ही होगा। कैसे अपने स्वार्थ के लिए, वह दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र की विश्वसनीयता को कमजोर करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश कर रही है। भारत की संवैधानिक संस्थाओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करना और उन पर सवाल उठाना कांग्रेस की आदत बन गई है। यह हैरानी की बात है कि देश की संवैधानिक संस्थाओं के बारे में गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां करके और लोकतंत्र में अविश्वास जताकर, कांग्रेस भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत का अपमान करने का पाप कर रही है।

आज कांग्रेस हमें लोकतंत्र पर उपदेश दे रही है। यह वही कांग्रेस है जिसने 1975 में देश में आपातकाल थोपा था। जिस कांग्रेस ने कभी आपातकाल लगाने की साजिश रची थी, उसका आज हमें लोकतंत्र पर उपदेश देना एक बेहद हास्यास्पद स्थिति पैदा करता है। भारत का हर नागरिक लोकतंत्र के प्रति पूरी तरह जागरूक है और वह जानता है कि लोकतंत्र के रास्ते में आने वाली बेड़ियों को कैसे मजबूती से तोड़ा जाए। फिर भी, कांग्रेस और उसके सहयोगी इस सच्चाई को मानने से इनकार करते हैं। अगर वे चुनाव जीतते हैं, तो वे इसे अपनी काबिलियत का सबूत बताते हैं। अगर वे हार जाते हैं, तो इसका दोष EVM पर मढ़ देते हैं।

जब भी कांग्रेस को मौका मिला, उसने देश को कठघरे में खड़ा करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। अलग-अलग प्रकार के घोटाले करने और देश की सुरक्षा से समझौता करने के बाद, जब कांग्रेस आम जनता का भरोसा पूरी तरह खो चुकी थी, तब देश ने तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपना विश्वास जताया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, हमने 2014 के बाद से भारत का कायापलट होते देखा है। 

2014 से पहले अविश्वास, अराजकता, नक्सलवाद, आतंकवाद और भ्रष्टाचार का ऐसा माहौल था कि कोई भी व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता था। 2014 के बाद का भारत सुरक्षित है और आतंकवाद तथा नक्सलवाद से मुक्त है। भारत ने वैश्विक मंच पर कभी सामने आए अपनी पहचान के संकट से उबर लिया है। अब यह कोई अस्थिर अर्थव्यवस्था नहीं है, न ही फ्रैजाइल फाइव का हिस्सा है। बल्कि यह तेजी से आगे बढ़ रही है और अब दुनिया की शीर्ष चार अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गई है।

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