भारत के स्पेस सेक्टर से बहुत अच्छी खबर आई है। भारत का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट, विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1, अपना फाइनल बर्न पूरा करने और अपने पेलोड को 450 km की कक्षा (ऑर्बिट) में पहुँचाने के बाद सफलतापूर्वक कक्षा में पहुँच गया है। इस उपलब्धि के साथ, भारत प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च की क्षमता रखने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है।
भारत के अलावा अमेरिका और चीन के पास ही फिलहाल ये क्षमता है। इस मिशन का नाम 'मिशन आगमन' रखा गया है। विक्रम-1 को हैदराबाद स्थित एक प्राइवेट भारतीय एयरोस्पेस कंपनी, स्काईरूट एयरोस्पेस ने बनाया था। इस रॉकेट को श्रीहरिकोटा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) से लॉन्च किया गया था।
केंद्रीय अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि, "एक छोटी सी स्पेस इकॉनमी से आज हम 9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के करीब पहुँच गए हैं और उम्मीद है कि एक दशक से भी कम समय में यह आँकड़ा लगभग 40-45 बिलियन तक पहुँच जाएगा। आज का सफल लॉन्च इस बात को फिर से साबित करता है कि भारत स्पेस इकॉनमी के बेहद प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में एक ग्लोबल प्लेयर के तौर पर शामिल हो गया है। भारत और ऊँचाइयों को छुए।"
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि आज हर भारतीय को गर्व महसूस हो रहा है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इसका सबसे अधिक श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। अगर उन्होंने 5-6 साल पहले स्पेस सेक्टर को खोलने और श्रीहरिकोटा के दरवाजे प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने का साहसी और लीग से हटकर फैसला न लिया होता, तो हम आज इस घटना के गवाह नहीं बन पाते, क्योंकि न तो यह लॉन्च होता और न ही स्काईरूट जैसी कंपनी होती।
उन्होंने कहा कि सिर्फ 5 सालों में, स्पेस इकॉनमी और स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। हमने एक यूनिकॉर्न भी तैयार किया है और वह कोई और नहीं बल्कि स्काईरूट है। इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे एक कर्मचारी ने बताया, "हम बहुत खुश हैं। सभी ने इस प्रोजेक्ट में अपना सब कुछ लगा दिया।" एक और कर्मचारी ने कहा, "यह मेरे लिए बहुत खुशी और गर्व का पल है। मेरा दिल जोरों से धड़क रहा है। हमारे युवा इंजीनियर बहुत मिलकर काम कर रहे थे।"
भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से बात की और उन्हें विक्रम-1 के सफल लॉन्च पर बधाई दी। X पर इस बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक अहम पड़ाव है। हमारे प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी नए रास्ते खोल रही है और इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है। यह उपलब्धि अनगिनत युवाओं को बड़े सपने देखने और बिना किसी डर के इनोवेशन करने के लिए प्रेरित करेगी।