मध्य प्रदेश के धार जिले में चर्चित भोजशाला मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस मुस्लिम पक्षों की अपीलों के जवाब में जारी किया गया है। इनमें हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें धार जिले के विवादित 11वीं सदी के भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस मामले की जांच करेगा।
अंतरिम उपाय के तौर पर, मुस्लिम समुदाय को परिसर से सटे खुले इलाके में दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज अदा करने की इजाजत दी जा सकती है। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को यह भी निर्देश दिया है कि वह उसकी मंजूरी के बिना कोई ढांचागत बदलाव (Structural Change) न करे। सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला मामले में पहले जैसी स्थिति (Status Quo Ante) बहाल करने से मना कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने प्रदेश सरकार, ASI और हिन्दू पक्ष को एक नोटिस जारी कर हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपीलों पर उनका जवाब मांगा है।
इस मामले की सुनवाई 2-3 हफ्ते बाद करने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये एक बहुत ही संवेदनशील मामला है। हमें ऐसा कोई भी आदेश पारित नहीं करना चाहिए, जिससे तनाव पैदा हो। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए। इससे पहले, 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने ASI के 2003 के उस आदेश को खारिज कर दिया था, जिसके तहत अलग-अलग दिनों में उस जगह पर हिंदू पूजा और मुस्लिम नमाज की अनुमति थी। मुस्लिम समुदाय को नमाज के लिए दूसरी जगह आवंटित करने के लिए राज्य सरकार के पास आवेदन करने की छूट दी गई थी।