22 जुलाई की रात देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हो गई। इस घटना में दो असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) समेत कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। हिंसा रात करीब 8.30 बजे शुरू हुई, जब दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कुछ उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थर और बोतलें फेंकीं।
घटना में घायल हुए एक स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया कि उनकी ड्यूटी जंतर-मंतर पर लगी थी। उन्होंने कहा कि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि उन्हें अपनी गाड़ी खड़ी करने के लिए भी जगह नहीं मिल रही थी। काफी कोशिश के बाद उन्होंने हनुमान मंदिर रोड पर गाड़ी पार्क की और पैदल ड्यूटी वाली जगह की ओर जाने लगे। रास्ते में उन्हें बड़ी संख्या में छात्र दिखाई दिए, इसलिए उन्हें शुरुआत में किसी तरह की परेशानी का अंदेशा नहीं हुआ।
इंस्पेक्टर के मुताबिक, जब वह संसद मार्ग पहुंचे, तब वहां करीब 2,500 लोग मौजूद थे। कुछ ही देर बाद माहौल अचानक बदल गया। भीड़ उनकी तरफ बढ़ने लगी और हंगामा शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि पीछे से कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें लात-घूंसों से मारा गया और वह खुद को बचा भी नहीं सके। उनके मुताबिक, करीब 150 लोग उन पर हमला कर रहे थे। बाद में पुलिस की एक टीम वहां पहुंची और उन्हें सुरक्षित निकालकर डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले गई।
उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना में कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी घायल हुए हैं। उनके अनुसार, हमला करने वाले लोग सिर्फ पुलिस को ही निशाना बना रहे थे। उन्होंने दावा किया कि वर्दी में दिखने वाले पुलिस, RAF और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के जवानों पर हमला किया जा रहा था। इतना ही नहीं, पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। उनका कहना था कि अकेले दिखने वाले सुरक्षाकर्मियों को घेरकर पीटा जा रहा था।
घटना में घायल एक हेड कॉन्स्टेबल ने भी अपनी आपबीती बताई। उन्होंने कहा कि शाम के समय अचानक बड़ी भीड़ उनकी तरफ आ गई। उन्हें इसकी कोई उम्मीद नहीं थी। भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया और बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। उनके अनुसार, वहां करीब 3,000 से 4,000 लोग मौजूद थे। कुछ लोगों के हाथों में पत्थर, लाठियां और चाकू भी थे। हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और उनका हाथ भी टूट गया।
हेड कॉन्स्टेबल ने बताया कि उनकी ड्यूटी सुबह 8 बजे से शुरू हुई थी और पूरे दिन वे वहीं तैनात रहे। दिनभर भीड़ मौजूद रही, लेकिन शाम होते-होते माहौल ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। उन्होंने बताया कि 'द पार्क होटल' के पास उन पर हमला किया गया। जब वह घायल होकर गिर गए, तब वहां मौजूद कुछ युवाओं ने आगे आकर उनकी मदद की और उन्हें भीड़ से बाहर निकाला।