20 जुलाई को शुरू हुआ मानसून सत्र आज 13 अगस्त को अनिश्चितकालीन काल के लिए स्थगित हो गया। इस सत्र को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कुछ बातें सामने रखीं। रिजिजू ने कहा कि आज मानसून सत्र समाप्त हो चुका है। हम इसे दो नजरिए से देखते हैं। कामकाज के लिहाज से ये बहुत सफल रहा। हमने कुल 12 बिल पास किए। हालांकि बहस और चर्चा के नजरिए से ये उतना सफल नहीं रहा। लोकसभा में जितना समय आवंटित किया गया, उस हिसाब से हमारी प्रोडक्टिविटी सिर्फ 19% रही। वहीं राज्यसभा में प्रोडक्टिविटी 39% रही।
आसान भाषा में कहें तो लोकसभा में तय समय का सिर्फ 19% और राज्यसभा में 39% समय ही काम हो पाया। बाकी समय हंगामे या अन्य कारणों से कार्यवाही नहीं चल सकी। जहाँ विपक्षी पार्टियों ने हंगामा किया और कभी-कभी वॉकआउट किया, वहीं NDA की ज्यादातर पार्टियों और कुछ विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने बहस और चर्चा में हिस्सा लिया। सिर्फ एक बिल, जो परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के मुद्दे से जुड़ा था, उस पर लोकसभा में पूरी चर्चा हुई।
इस सत्र के दौरान पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल इस कानून पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में चर्चा हुई। रिजिजू ने कहा कि चर्चा की दृष्टि से हम खुश नहीं हैं, क्योंकि विपक्ष ने ठीक से बहस नहीं होने दी, खासकर लोकसभा में। मैंने पहली बार देखा कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है। विपक्ष सरकार से जवाब मांगता है और सरकार जवाब देने के लिए बाध्य है। फिर भी, संसद के अंदर हमने देखा कि सरकार खुद चर्चा चाहती थी, जबकि विपक्ष उससे बचने के लिए बहाने बना रहा था। यह संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है।
मैंने एक और बात देखी है कि कांग्रेस सांसदों को लगता है कि उनका मुख्य काम सिर्फ नारे लगाना और प्लेकार्ड व बैनर लेकर हंगामा करना है। उन्होंने यही सोच अपना ली है। वे सुबह उठते हैं, तकिया उठाते हैं, संसद परिसर जाते हैं और नारेबाजी व अपशब्द कहने में लग जाते हैं। उनका काम बस इतना ही रह गया है। उन्होंने यही स्थिति बना दी है। संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर, मुझे कांग्रेस सांसदों, खासकर नए सांसदों के लिए सचमुच दुख होता है।
मैं बहुत संवेदनशील व्यक्ति हूँ और कांग्रेस सांसदों का दर्द समझ सकता हूँ। अगर बहस या चर्चा ही नहीं होगी, तो वे कैसे सीखेंगे? मैं वरिष्ठ सदस्यों से तो ज्यादा कुछ नहीं कह सकता, लेकिन नए सांसदों को बहस और चर्चा का मौका नहीं मिला। गलती कांग्रेस पार्टी की है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि जब हम शीतकालीन सत्र के लिए दोबारा मिलेंगे, तो स्थिति में सुधार होगा।