आपातकाल के 51 साल पूरे, प्रधानमंत्री मोदी ने इसे संविधान पर सीधा हमला बताया

आपातकाल के दौरान के, पूरे देश में लगभग 1 करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी भी की गई थी। भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गिरफ्तारी से बचने के लिए एक सिक्ख व्यक्ति का वेश धर लिया था, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी मौजूद है।

आपातकाल के 51 साल पूरे, प्रधानमंत्री मोदी ने इसे संविधान पर सीधा हमला बताया

आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय माना जाता है।

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Highlights

  • जून 1975 से मार्च 1977 तक चले आपातकाल में 1 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
  • NCERT ने कक्षा 9वीं की सोशल साइंस की पुस्तक में आपातकाल के मुद्दे को शामिल किया है।
  • भारतीय जनता पार्टी देशभर में इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में मना रही है।

आज 25 जून 2026 है और आपातकाल (Emergency) को 51 साल पूरे हो गए हैं। 1975 में इसी दिन विवादास्पद आपातकाल लगाया गया था। इसे याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "संविधान हत्या दिवस आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन।"

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने बताया, " इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताएँ छीन ली गईं, अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाई गई, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और समाज सेवकों को गिरफ्तार किया गया। हम सभी के लिए, हमारा संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। अपने संविधान की भावना से प्रेरित होकर, हम एक ऐसा भारत बनाएंगे जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहे।"

भाजपा पूरे देश में इस दिन को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मना रही है। इस अवसर पर भारत के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन आज हरियाणा के रोहतक में होंगे, जहां वो एक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रोहतक, पंचकूला और फरीदाबाद में लोकतंत्र रक्षा सेनानियों को सम्मानित भी किया जाएगा। पंचकूला में स्वयं नायब सिंह सैनी और राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा भी मौजूद रहेंगे।

देश भर में अलग-अलग नेताओं द्वारा विभिन्न प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं हैं। चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "आज का दिन हम काला दिवस के रूप में मनाते हैं। 25 जून 1975, आज भी जब लोग इस दिन को याद करते हैं तो थरथरा जाते हैं कि किस प्रकार से इंदिरा गांधी और कांग्रेस की सरकार ने संविधान की जो धज्जियां उड़ाई थीं और लोगों को जेलों में मारा गया था, प्रताड़ित किया गया था वो काला दौर कोई भी नहीं भूला है।"

भाजपा-उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए बताया कि हम आपातकाल की 51वीं बरसी इसलिए मना रहे हैं ताकि आज की पीढ़ी को पता चले कि कैसे एक परिवार के एक सदस्य और एक सरकार को बचाने के लिए संविधान और विपक्ष पर हमला किया गया था।"

NCERT ने कक्षा 9वीं की सोशल साइंस की पुस्तक में भी आपातकाल के मुद्दे को शामिल किया है। नई किताब, "अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड" में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई "बड़ी चुनौतियों में से एक" बताया गया है। इस पर विपक्षी नेताओं की ओर से अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (SP) नेता सुप्रिया सुळे ने कहा कि, ये बड़े दुःख की बात है कि शिक्षा और पढ़ाई में आज राजनीति ललाई जा रही है। 

शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, "पिछले 12 वर्षों में देश के हालात पर भी चर्चा होनी चाहिए। इंदिरा गांधी ने किसी राजनीतिक दल को नहीं तोड़ा और न ही संविधान को खत्म किया। आपातकाल केवल अध्ययन का विषय नहीं है, बल्कि संविधान में इसका प्रावधान भी है। संविधान प्रधानमंत्री को यह अधिकार देता है कि यदि देश में अराजकता फैलती है तो वे आपातकाल लागू कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको संविधान का सम्मान नहीं करना चाहिए।"

उन्होंने आगे बताया, "मैं पूछना चाहता हूं कि नोटबंदी क्यों लागू की गई? COVID-19 महामारी के दौरान सख्त प्रतिबंध और आपातकालीन उपाय क्यों अपनाए गए? ये सभी उपाय संविधान और कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों के आधार पर लागू किए गए थे। लेकिन आज, जो लोग संविधान की बात करते हैं, वे वास्तव में इसकी मूल भावना का सम्मान नहीं करते हैं।"

राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी कहा कि, "जब भी किसी राज्य या केंद्र में BJP सरकार सत्ता में होती है, तो वे इतिहास को अपनी मर्जी के मुताबिक पेश करने की कोशिश करते हैं।" खबरों की मानें तो, 21 मार्च 1977 तक चले आपातकाल के दौरान 1 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

जेल गए कुछ प्रमुख नेताओं का उल्लेख करें, तो इनमें जयप्रकाश नारायण, राज नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई और जॉर्ज फर्नांडीस जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं। आपातकाल के दौरान, पूरे देश में लगभग 1 करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी भी की गई थी। भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गिरफ्तारी से बचने के लिए एक सिक्ख व्यक्ति का वेश धर लिया था, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी मौजूद है

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