शादीशुदा पुरुष के साथ रह सकती है महिला, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने कहा- 'ऐसा कोई कानून नहीं जो...'

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोई कानून बालिग महिला को शादीशुदा पुरुष के साथ रहने से नहीं रोकता। महिला को अपनी पसंद से जीने का अधिकार है। केवल पहली पत्नी द्विविवाह का केस दर्ज कर सकती है। कोर्ट नैतिकता के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

शादीशुदा पुरुष के साथ रह सकती है महिला, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने कहा- 'ऐसा कोई कानून नहीं जो...'

ऐसा कोई कानून नहीं जो शादीशुदा पुरुष के साथ महिला को रहने से रोकता हो: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट

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Highlights

  • शादीशुदा पुरुष के साथ रह सकती है महिला।
  • कोई कानून बालिग महिला को शादीशुदा पुरुष के साथ रहने से नहीं रोकता।
  • एक महिला की हिरासत से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई।

भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक सुनवाई के बीच कहा है कि महिला अपनी मर्जी से किसी शादीशुदा मर्द के साथ अपना जीवन जी सकती है या फिर उनके साथ रह सकती है। ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी महिला को पहले से विवाहित पुरुष के साथ रहने से रोक सकता है। कोर्ट ने इस बारें में ये भी कहा है कि यदि वह विवाह कर लेते है, तो केवल पहली पत्नी ही द्विविवाह का केस दर्ज करवा सकती है। अपनी बात को जारी रखते हुए ये भी कोर्ट ने कहा कि वह नैतिकता के केस में दखल नहीं देगा। 

विवाहित मर्द के साथ रह सकती है महिला :

खबरों का कहना है कि एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए मप्र हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई भी कानून किसी महिला को शादीशुदा पुरुष के साथ रहने से नहीं रोकता। कोर्ट ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि यदि कोई महिला शादी करती है, तो केवल पहली पत्नी ही द्विविवाह का केस दर्ज करवा सकती है। 

आखिर क्या है मामला : 

मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि अदालत 18 साल से ज्यादा उम्र की एक महिला की हिरासत के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में इल्जाम लगाया गया था कि महिला एक विवाहित व्यक्ति के साथ रहने के लिए चली गई थी, जबकि उसे अपने माता-पिता के साथ ही रहना चाहिए थे, इस सुनवाई के समय वकील ने कोर्ट को जानकारी दी कि महिला जिस व्यक्ति के साथ रहना चाहती है, उसने अपनी पहली पत्नी को छोड़ दिया है और अब उससे तलाक मांग रहा है।

क्या बोली मध्यप्रदेश हाईकोर्ट? :

इतना ही नहीं बार बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 18 अगस्त को दिए अपने निर्णय में बोला है कि महिला बालिग है और उसे यह तय करने का पूर्ण अधिकार है कि वह किसके साथ रहना चाहती है। वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला उस व्यक्ति के साथ रहना चाहती है, चाहे वह पहले से शादीशुदा हो या फिर कुंवारा, यह उसका निजी फैसला होगा। इतना ही नहीं महिला को यह भी तय करने का पूर्ण अधिकार है कि उसके लिए क्या सही है और क्या गलत। कोर्ट नैतिकता से जुड़े मामलों में कोई तर्क नहीं दे सकता और यह मानते हुए कि महिला को उस पुरुष के साथ रहने का अधिकार है जिसके साथ वह रहना चाहती है।

अदालत ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि चूंकि महिला ने अपने माता-पिता के साथ रहने से मना कर दिया है, इसलिए पुलिस से अनुरोध है कि वह महिला से यह वचनपत्र लेने के पश्चात उसे रिहा कर दें कि वह अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने वाली है  एवं जिस व्यक्ति के साथ वह रह रही है उससे भी यह पुष्टि ले लें कि उसने उसके साथ रहना स्वीकार किया है। 

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