वैश्विक तेल-गैस कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, 2026 में GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान

वैश्विक स्तर पर तेल-गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, नियंत्रित महंगाई, मजबूत घरेलू मांग और बढ़ते निवेश के चलते वित्त वर्ष 2026 में भारत की GDP ग्रोथ 7% से 7.4% के बीच रहने का अनुमान जताया गया है।

वैश्विक तेल-गैस कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, 2026 में GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान

CEA और अन्य विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था 7%-7.4% के बीच की ग्रोथ दर्ज करेगी।

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Highlights

  • कच्चे तेल और LNG की बढ़ती कीमतों के झटकों से निपटने के लिए भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है।
  • वित्त वर्ष 2026 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर लगभग 7% से 7.4% के बीच किया गया।
  • मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, घरेलू मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से अर्थव्यवस्था को मिल रहा सहारा।

इस समय दुनियाभर में तेल और गैस की कीमतों को लेकर काफी हलचल मची हुई है। लेकिन इसी बीच भारत के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। ताजा आर्थिक आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की बढ़ती कीमतों के झटकों को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार है। इतना ही नहीं, देश की अर्थव्यवस्था को देखते हुए वित्त वर्ष 2026 के लिए ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर अब 7.4% कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) है। साथ ही वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में GDP का लगभग 0.8% करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) रहने का अनुमान है और महंगाई दर भी नियंत्रित बनी हुई है।

दरअसल, मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से दुनियाभर में सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी है। माना जा रहा है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत जैसे देशों पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार तो है ही, साथ ही तेल आयात के स्रोतों में भी विविधता लाई गई है, जिससे अचानक आने वाले झटकों का असर काफी हद तक संभाला जा सकता है। भारत में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ रहा है और सरकार भी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।

यही कारण है कि मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) और अन्य विश्लेषकों ने आने वाले समय के लिए विकास दर के अनुमान को पहले से थोड़ा बेहतर बताया है। माना जा रहा है कि अब भारत की अर्थव्यवस्था 7% से 7.4% के बीच की ग्रोथ दर्ज कर सकती है। इसके अलावा भारत के कई देशों के साथ बढ़ते व्यापारिक संबंध और संभावित समझौते भी अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकते हैं। साथ ही खेती में भी अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है। दुनिया के अन्य हिस्से भले ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हों, लेकिन भारत अपनी आंतरिक स्थिरता और सक्रिय कूटनीति के दम पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ब्राइट स्पॉट के रूप में उभर रहा है। सरल शब्दों में कहें तो बाहर कितनी भी उथल-पुथल क्यों न हो, भारत की आर्थिक गाड़ी आगे बढ़ती रहने की मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।

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