उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ में कृषि विभाग में 3,000 से अधिक लोगों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इसकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा से 'मिशन रोजगार' के अंतर्गत उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा कृषि विभाग के लिए नव चयनित 3,446 प्राविधिक सहायकों (ग्रुप-सी) एवं मंडी परिषद में श्रेणी-3, वर्ग-2 के 126 मंडी सचिवों को आज नियुक्ति-पत्र प्रदान किया। जब हम योग्यतम अभ्यर्थियों का चयन बिना किसी भेदभाव के करते हैं तो उनकी प्रतिभा और ऊर्जा का लाभ पूरे प्रदेश को मिलता है। यही पिछले साढ़े 9 वर्षों में डबल इंजन सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है। सभी नव चयनित अभ्यर्थियों एवं उनके परिजनों को हार्दिक बधाई व उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।"
इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही एवं कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्यक्रम को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि आज के दिन पारदर्शी तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करना अपने आप में एक चुनौती है। आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए और बिना किसी भेदभाव के, यह सुनिश्चित करना कि योग्य उम्मीदवारों को उनकी योग्यता के आधार पर नियुक्ति पत्र मिलें, एक बेहद मुश्किल काम है। लेकिन हमारा आयोग और बोर्ड इसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से पहले, उत्तर प्रदेश को 'बीमारू' राज्य कहा जाता था। युवा पलायन कर रहे थे, किसान आत्महत्या कर रहे थे। बेटियों की सुरक्षा खतरे में थी, व्यापारी माफिया से परेशान थे और किसानों को अपने ही खेतों में जाने से डर लगता था। उन्हें अक्सर पता भी नहीं चलता था कि उनकी फसल कब चोरी हो गई। उत्तर प्रदेश की यही सच्चाई थी। आज मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमने राज्य में 9,30,000 युवाओं को रोजगार दिया है। इसका नतीजा क्या है? इन 9,30,000 लोगों ने उत्तर प्रदेश को 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' का फायदा उठाने में मदद की है। उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में योगदान दिया है। हमने उनकी प्रतिभा का सही इस्तेमाल किया है।
योगी आदित्यनाथ के अनुसार, "पहले हाई स्कूल या इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा और उसके नतीजे आने में तीन-तीन महीने लग जाते थे। इस तरह साल के 6 महीने बर्बाद हो जाते थे। तब सरकार क्या कहती थी? कि नकल करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए, उन्होंने राज्य के युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया था। वे हितैषी नहीं थे, वे युवाओं के दुश्मन थे। उन्होंने आपके सामने पहचान का संकट पैदा कर दिया था। आज, हमने उस 6 महीने के समय को कम कर दिया है। मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाएं 14 दिनों में आयोजित करता हूं और अगले 14 दिनों में नतीजे भी जारी कर देता हूं। उस परीक्षा में 56 लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि आज चीनी की क्राइसिस चर्चा चल रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश में चीनी की कमी नहीं है। उत्तर प्रदेश की एक महीने की कुल खपत है 4 लाख टन। इसके मुकाबले हमारे पास 28 लाख टन का स्टॉक है। यानी हमारे पास 7 महीने की सप्लाई मौजूद है। इसके अलावा, हम 15 अक्टूबर को चीनी मिलें फिर से शुरू करेंगे। हम अपनी मिलों के जरिए 90 लाख टन यानी 900 लाख क्विंटल और चीनी का उत्पादन करेंगे। उत्तर प्रदेश में इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की क्षमता है। उत्तर प्रदेश न केवल अपनी 25 करोड़ की जनता, बल्कि भारत की पूरी 140 करोड़ की जनता का पेट भरने का सामर्थ्य रखता है।