फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा दौरा है, जहां वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट 2026 में हिस्सा लेंगे। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जहां भारत-फ्रांस ने अपने रिश्तों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ (Special Global Strategic Partnership) का नया नाम दिया। अपने रिश्तों को बेहतर बनाना दोनों देशों के विजन और महत्वाकांक्षा को दिखाता है। इससे न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में चुनौतियों का सामना करने के लिए वे मिलकर काम कर सकेंगे।
दोनों देशों ने तय किया है कि वे अब सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त नहीं करेंगे, बल्कि मिलकर हथियार बनाएंगे। इसके तहत कर्नाटक में H-125 हेलीकॉप्टर बनाने की एक नई असेंबली लाइन का उद्घाटन किया गया है। खास बात यह है कि यह भारत में निजी क्षेत्र की पहली हेलीकॉप्टर निर्माण इकाई होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि भारत में बने ये हेलीकॉप्टर इतने ताकतवर होंगे कि माउंट एवरेस्ट जितनी ऊंचाई तक उड़ सकेंगे और इन्हें दूसरे देशों को बेचा भी जाएगा। साथ ही, हैमर मिसाइल को भारत में ही बनाने के लिए भी समझौता हुआ है। साल 2026 को भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन के रूप में मनाया जा रहा है। इसका मकसद AI और ग्रीन एनर्जी जैसी तकनीकों में मिलकर काम करना है। इसी कड़ी में दिल्ली के AIIMS में स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के इस्तेमाल के लिए एक विशेष केंद्र खोलने की बात कही गई है। इससे इलाज की तकनीकों में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने फ्रांस में UPI की लगातार हो रही प्रगति पर भी खुशी जताई। फ्रांस UPI एक्सेप्ट वाला पहला यूरोपियन देश है। कई बड़े स्टोर पहले से ही UPI एक्सेप्ट करते हैं, जिससे पेरिस भारतीय टूरिस्ट के लिए और भी आकर्षक जगह बन गया है। दोनों नेताओं ने टूरिस्ट के पेमेंट को बेहतर बनाने के लिए सुरक्षित और अच्छे डिजिटल पेमेंट तरीकों को ज्यादा एक्सेप्ट करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई।
व्यापार को आसान बनाने के लिए दोनों देशों ने ‘डबल टैक्स’ से जुड़े नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है। इससे भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों को एक-दूसरे के देश में निवेश करने में आसानी होगी और टैक्स का बोझ कम होगा। इसके अलावा, फ्रांस ने 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों को अपने यहां बुलाने का लक्ष्य रखा है, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को बड़े अवसर मिलेंगे। कुल मिलाकर, मोदी और मैक्रों की यह मुलाकात भारत और फ्रांस के रिश्तों को जमीन से आसमान तक ले जाने की एक बहुत अच्छी कोशिश है। यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए अच्छी है, बल्कि पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भी बहुत जरूरी है।