भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय 5 देशों की यात्रा पर हैं, जिनमें UAE, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल हैं। UAE के बाद उनका अगला पड़ाव नीदरलैंड्स रहा। शुक्रवार को एम्स्टर्डम पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने बड़े ही गमजोशी के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की और लिखा, "कल नीदरलैंड्स में भारतीय प्रवासियों द्वारा किया गया स्वागत असाधारण था। इस स्वागत समारोह में कथक, ओडिसी, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम सहित विभिन्न नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। इसमें गरबा नृत्य की प्रस्तुति भी शामिल थी।" आज 16 मई को भी उन्होंने "द हेग" शहर में उन्होंने एक कम्युनिटी प्रोग्राम को संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज इतना प्यार और उत्साह देखकर मैं एक पल के लिए भूल ही गया कि मैं नीदरलैंड्स में हूँ। ऐसा लगा जैसे भारत में ही कही कोई फेस्टिवल चल रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि वैसे तो द हेग को दुनिया 'सिटी ऑफ जस्टिस एंड पीस' के रूप में जानती है। लेकिन आज यहां जो माहौल है, उसे देखकर लगता है द हेग 'लिविंग सिंबल ऑफ इंडियन फ्रेंडशिप' बन गया है। उन्होंने आगे कहा कि जब भी मेरी नीदरलैंड्स के लीडर्स से बातचीत हुई, उन्होंने हमेशा भारतीय डायस्पोरा की तारीफ की है। नीदरलैंड्स के समाज और इकोनॉमी में उनके योगदान पर हर भारतवासी को गर्व है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में एक और खास पल का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आज से 12 साल पहले, 16 मई 2014 को, लोकसभा चुनावों के नतीजे घोषित किए गए थे। दशकों बाद, भारत में एक स्थिर और पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी थी। उन्होंने कहा, "कोटि-कोटि भारतीयों का विश्वास न मुझे रुकने देता है और न थकने देता है।"
उन्होंने बताया, "आज भारत बड़े सपने देख रहा है। भारत का युवा AI और सेमीकंडक्टर के क्षेत्रों में देश को आगे ले जाने की आकांक्षा रखता है। भारत दुनिया का तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम वाला देश है। दुनिया की सबसे बड़ी और सफल AI समिट और G20 समिट भारत ने आयोजित की। देश इस समय अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रहा है। भारत इस समय दुनिया की सबसे बड़ी गवर्मेंट फंडेड हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम भी चला रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने वर्तमान संकटों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "आज मानवता के सामने अनेक बड़ी चुनौतियां हैं। पहले कोरोना आया, फिर युद्ध शुरु हुआ और अब एनर्जी क्राइसिस। दुनिया के लिए ये दशक आपदाओं का दशक बनता जा रहा है। हम सभी जानते हैं कि अगर हालात नहीं बदले, तो पिछले कई दशकों की उपलब्धियों पर पानी फिर जाएगा। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी फिर से गरीबी के दलदल में चली जाएगी। ऐसे समय में, भारत और नीदरलैंड्स भविष्य के लिए ट्रस्टेड, ट्रांसपेरेंट और फ्यूचर रेडी सप्लाई-चेन बनाने में जुटे हैं।"