राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अयोध्या में की गई श्रीराम यन्त्र की स्थापना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम मंदिर में आरती-दर्शन किए तथा प्रभु से सबकी सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इस कार्यक्रम से पहले, राष्ट्रपति मुर्मू सुबह करीब 10.30 बजे अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची। वहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक ने उनका स्वागत किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अयोध्या में की गई श्रीराम यन्त्र की स्थापना

राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना की गई।

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Highlights

  • 150 किलोग्राम वजनी, सोने की परत चढ़े इस श्रीराम यंत्र पर वैदिक और बीज मंत्र उकेरे गए है।
  • यह यंत्र सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए बनाया गया है व श्रीराम की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है।
  • इसका निर्माण जगद्गुरु श्री शंकर विजयेंद्र सरस्वती स्वामीगल के मार्गदर्शन में किया गया है।

धर्मनगरी अयोध्या से एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरूवार, 19 मार्च को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना की है। हिंदू नववर्ष यानी गुड़ी पाड़वा के पावन अवसर पर आयोजित हुआ यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक रूप से खास है, बल्कि ये मंदिर के निर्माण कार्य की पूर्णता का भी प्रतीक है। मंदिर के दूसरे तल पर इस यंत्र की स्थापना के साथ ही अब मंदिर का निर्माण कार्य अब पूरी तरह से संपन्न माना जा रहा है। मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने बताया कि वैदिक गणित पर आधारित यह यंत्र सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए बनाया गया है और भगवान राम की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है।

150 किलोग्राम वजनी, सोने की परत चढ़े इस यंत्र पर वैदिक और बीज मंत्र उकेरे गए हैं। इस यंत्र को कांची कामकोटि पीठम के श्रीराम यंत्र के आधार पर बनाया गया है और इसका निर्माण जगद्गुरु श्री शंकर विजयेंद्र सरस्वती स्वामीगल के मार्गदर्शन में किया गया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने श्रीराम मंदिर में आरती-दर्शन किए तथा प्रभु श्रीराम से सबकी सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इस कार्यक्रम से पहले, राष्ट्रपति मुर्मू सुबह करीब 10.30 बजे अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची। वहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक ने उनका स्वागत किया। अपनी यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति ने लगभग 400 ऐसे श्रमिकों को भी सम्मानित किया, जिन्होंने मंदिर के निर्माण में योगदान दिया है।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में माता अमृतानंदमयी और स्वामी गोविंद देव गिरी भी उपस्थित थे। राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा को देखते हुए, पूरे शहर में बड़े पैमाने पर इंतजाम किए गए थे। मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों को केसरिया झंडों और बैनरों से सजाया गया था, जिससे एक उत्सवपूर्ण और भक्तिमय माहौल बन गया था। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने सम्बोधन में कहा, "प्रभु श्रीराम ने जिस अयोध्या नगरी में जन्म लिया उसकी पवित्र धूलि का स्पर्श प्राप्त करना ही मैं अपना परम सौभाग्य मानती हूं। स्वयं प्रभु श्रीराम ने अपनी इस जन्मभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया था।​"

उन्होंने आगे कहा, "इस परम पवित्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन, यहां रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण की तिथियां हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं।​ हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 या शायद उससे पहले ही हम उन लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे।​ राम-राज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे।​ मैं चाहूंगी कि हमारे सभी देशवासी "घट-घट व्यापी राम" के पवित्र भक्ति-भाव के साथ एकात्म होकर आगे बढ़ें।​ हमारे देश का पुनर्जागरण आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक, इन सभी आयामों पर हो रहा है। देव-भक्ति और देश-भक्ति, दोनों का मार्ग एक ही है।"

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