भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड समझौता, व्यापार को मिलेगी एक नई रफ्तार

इस डील में एनर्जी प्रोडक्ट्स, महंगी धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोयले जैसी वस्तुएं शामिल हैं।

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड समझौता, व्यापार को मिलेगी एक नई रफ्तार

भारत और अमेरिका के व्यापार के रिश्तों में एक नया और बड़ा अध्याय शुरू होने जा रहा है।

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Highlights

  • भारत और अमेरिका ने अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर सहमति जताई, 500 अरब डॉलर्स का व्यापार लक्ष्य तय।
  • भारत अमेरिका से ऊर्जा, विमान, तकनीक और कोकिंग कोयला खरीदेगा।
  • टैरिफ में कटौती से निर्यात बढ़ने की उम्मीद, किसानों के हितों पर भारत का जोर बरकरार।

भारत और अमेरिका के व्यापार के रिश्तों में एक नया और बड़ा अध्याय शुरू होने जा रहा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट के तहत ये जानकारी सामने आई है कि भारत अमेरिका से अगले 5 सालों में लगभग 500 बिलियन डॉलर्स का सामान खरीदने का इरादा रखता है। ये फैसला दोनों देशों की इकोनॉमी को मजबूती देने वाला माना जा रहा है। इस डील के तहत भारत अमेरिका से कई जरूरत की वस्तुएं खरीदेगा। इन सबसे खास है एनर्जी प्रोडक्ट्स। इसके अलावा विमान और उनके पार्ट्स, महंगी धातुएं, आधुनिक टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल भी इस डील में शामिल है। माना जा रहा है कि इससे भारत की अपनी ऊर्जा और तकनीकी जरूरतें पूरी होंगी ही, साथ ही भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्ते भी और मजबूत होंगे।

इस समझौते की एक बड़ी बात यह भी है कि अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है। इसका सीधा फायदा भारत के एक्सपोर्टर्स को होगा, खासकर उन क्षेत्रों में जो जेनेरिक दवाएं, हीरे-जवाहरात और विमान के पुर्जे तैयार करते हैं। दूसरी तरफ, भारत भी अमेरिका से आने वाले कई सामानों और कुछ कृषि उत्पादों जैसे ताजे फल, बादाम और सोयाबीन तेल पर टैक्स कम करेगा। इससे बाजार में कुछ विदेशी सामानों के दाम कम हो सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई इस बातचीत के बाद जारी साझा बयान से यह साफ है कि दोनों देश एक-दूसरे के बाजार में अपनी पैठ बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, भारत ने यह भी साफ किया है कि वह अपने किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।

यह डील केवल खरीददारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सप्लाई चेन को मजबूत करने और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मिलकर काम करने का एक बड़ा मौका है। अगर यह योजना सही ढंग से लागू होती है, तो आने वाले सालों में भारत और अमेरिका के बीच का व्यापार एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा, जिससे दोनों देशों में रोजगार और विकास के नए रास्ते खुलेंगे।

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