बिहार के कद्दावर नेता और वर्तमान में पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव को लेकर शुक्रवार देर रात हुई कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। पटना पुलिस ने शुक्रवार रात पप्पू यादव को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी किसी नए मामले में नहीं, बल्कि करीब 30 साल पुराने एक केस में अदालत द्वारा जारी वॉरंट के आधार पर की गई है। सांसद की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में उनके आवास के बाहर उनके समर्थक जुट गए। रात करीब 10-11 बजे भारी पुलिस बल उनके घर के बाहर पहुंचा, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस और सांसद समर्थकों के बीच काफी देर तक बहस होती रही। इस दौरान समर्थकों ने नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन भी किया।
पप्पू यादव ने भी शुरूआत में गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाए और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी मांगी। करीब 3 घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद पुलिस उन्हें देर रात अपने साथ ले जाने में सफल रही। गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव ने मीडिया से बातचीत की और कहा कि उनकी जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को संदिग्ध बताया। उन्होंने बताया कि पुलिस रात को सिविल ड्रेस में उनके घर पहुंची, जो उन्हें असामान्य लगा। पप्पू यादव ने यह भी कहा कि हाल ही में उन्होंने पटना में NEET छात्रा की मौत को लेकर सरकार को घेरा था, जिस वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। इस मामले में उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाया था।
दरअसल जिस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया है, वो साल 1995 का है, जो पटना के दर्जनीबाग थाने में दर्ज हुआ था। आरोप है कि पप्पू यादव ने धोखाधड़ी के जरिए एक मकान किराए पर लिया और बाद में उसे अपने दफ्तर के रूप में इस्तेमाल किया। उस मकान के मालिक का कहना था कि उसे अंधेरे में रखकर ये समझौता किया गया था। कोर्ट ने कई बार उन्हें इस केस में पेश होने के लिए समन भेजे थे, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। अंत में अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश जारी कर दिया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस पप्पू यादव को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गई। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।