मध्य प्रदेश नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला पहला राज्य, दो हिंदू सदस्य शामिल

नोटिफिकेशन में बताया गया है कि नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल अप्रैल 2028 तक चलेगा। अप्रैल 2023 में चुने गए सदस्यों की श्रेणी से पहले नियुक्त होने के कारण, वह अपनी भूमिका निभाती रहेंगी। उनके कार्यकाल के बाकी समय के लिए उनका नाम नए नोटिफिकेशन में शामिल किया गया है।

मध्य प्रदेश नए कानून के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला पहला राज्य, दो हिंदू सदस्य शामिल

प्रदेश सरकार द्वारा बोर्ड का पुनर्गठन करना एक बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

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Highlights

  • उज्जैन के डॉ. सनवर पटेल को वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
  • अन्य सदस्यों में पूर्व केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला और आतिफ अकील भी शामिल है।
  • हिंदू समाज से इंदौर के मनोज मालपानी और राघौगढ़ (गुना) के अनिमेश भार्गव भी सदस्य है।

मध्य प्रदेश (MP) से एक बड़ी खबर सामने आई है MP संशोधित वक्फ अधिनियम के तहत अपना वक्फ बोर्ड फिर से गठित करने वाला पहला राज्य बन गया है। इस नए 10-सदस्यीय बोर्ड में दो हिंदू सदस्य भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने एक गजट अधिसूचना के माध्यम से बोर्ड के पुनर्गठन की घोषणा की। सदस्यों की बात करें तो उज्जैन के डॉ. सनवर पटेल को बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

इसके अलावा, पूर्व अल्पसंख्यक कार्य मंत्री और राज्यसभा की पूर्व उपसभापति नजमा हेपतुल्ला को भी बोर्ड में शामिल किया गया है। अन्य सदस्यों में आतिफ अकील (भोपाल उत्तर से विधायक), फैजान खान (उज्जैन), फातेमा चौधरी (इंदौर), शाइस्ता सुल्तान (बैरसिया, भोपाल से पार्षद) और शबाना खान (रतलाम से पार्षद) शामिल हैं।

हिंदू सदस्यों में इंदौर के मनोज मालपानी और राघौगढ़ (गुना) के अनिमेश भार्गव शामिल हैं। पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण आयुक्त भी दसवें सदस्य के तौर पर बोर्ड में शामिल किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अनिमेश भार्गव फाइनेंस सेक्टर से जुड़े हैं और मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मीडिया पैनलिस्ट भी हैं। नोटिफिकेशन में ये भी साफ किया गया है कि नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल अप्रैल 2028 तक चलेगा।

अप्रैल 2023 में चुने गए सदस्यों की श्रेणी से पहले नियुक्त होने के कारण, वह अपनी भूमिका निभाती रहेंगी। उनके कार्यकाल के बाकी समय के लिए उनका नाम नए नोटिफिकेशन में शामिल किया गया है। बता दें कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम अप्रैल 2025 में पास किया गया था। नए वक्फ कानून के नियमों को जल्दी लागू करने के लिए सरकार द्वारा बोर्ड का पुनर्गठन करना एक बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।

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