नंदीग्राम उपचुनाव : पुराने मुकदमों में फंसे कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान, गिरफ्तारी पर शुरू विवाद

जानकारी के मुताबिक, मिलान प्रधान 2007 के नंदीग्राम जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में पिछले 19 सालों से फरार थे और लगातार कानूनी कार्रवाई से बच रहे थे। वारंट पर अमल न हो पाने के कारण, पुलिस ने चार्जशीट में उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था।

नंदीग्राम उपचुनाव : पुराने मुकदमों में फंसे कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान, गिरफ्तारी पर शुरू विवाद

कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें आज अदालत में पेश किया गया।

Share:

Highlights

  • मिलन प्रधान को 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
  • मिलन प्रधान पर हत्या, अपहरण, सबूत मिटाने, जबरन घर में घुसने और हथियारों के साथ दंगा भड़काने जैसे आरोप है।
  • लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें आज अदालत में पेश किया गया। प्रधान की यह गिरफ्तारी साल 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े लंबित मामलों के सिलसिले में की गई है। पुलिस के मुताबिक, उन पर हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, सबूत मिटाने, जबरन घर में घुसने और घातक हथियारों के साथ दंगा भड़काने जैसे कई गंभीर आरोप हैं।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2007 के इन मामलों में मिलन प्रधान पिछले 19 साल से फरार चल रहे थे और लगातार कानूनी प्रक्रिया से बच रहे थे। बार-बार वारंट तामील न होने के कारण पुलिस ने उन्हें चार्जशीट में भगोड़ा घोषित किया था। पुलिस का कहना है कि लंबे समय से लंबित गैर-जमानती वारंटों पर कार्रवाई करना भारत निर्वाचन आयोग का सभी चुनावों और उपचुनावों के लिए एक स्थायी निर्देश है और यह गिरफ्तारी एक विशेष अभियान के दौरान नियमों के पालन की दिशा में उठाया गया कानूनी कदम है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में आगे की जानकारी का इंतजार है।

इस मामले पर कांग्रेस पार्टी की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। कल, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 'X' पर एक पोस्ट में लिखा, "नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध है - लोकतंत्र की हत्या है। BJP का निष्पक्ष चुनाव में भरोसा ही नहीं - इसलिए कभी वोट चोरी, कभी सरकार चोरी और कभी पार्टी चोरी से सत्ता बचाना चाहती है। वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते, चुनावी मुकाबला ही खत्म कर देना चाहते हैं। कांग्रेस न डरेगी, न झुकेगी। हम लड़ेंगे भी, जीतेंगे भी।"

हालांकि, BJP पश्चिम बंगाल ने तुरंत इस पोस्ट का जवाब देते हुए एक पोस्ट में अरेस्ट वारंट की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "राजनीतिक बदले की भावना" और "लोकतंत्र की हत्या" का आरोप लगाने से पहले, कांग्रेस को कुछ मुश्किल तथ्यों का जवाब देना चाहिए। नंदीग्राम उपचुनाव के लिए उनके उम्मीदवार मिलन प्रधान के खिलाफ इन मामलों में चार वारंट पेंडिंग हैं:

1. नंदीग्राम PS केस नंबर 75/07 (30.04.2007): IPC की धारा 147, 148, 149, 448, 302 और 506, और आर्म्स एक्ट की धारा 27
2. नंदीग्राम PS केस नंबर 221/07 (15.11.2007): IPC की धारा 147, 148, 149, 326, 364, 302 और 201
3. नंदीग्राम PS केस नंबर 188/07 (08.11.2007): IPC की धारा 147, 148, 149, 324, 307 और 302, और आर्म्स एक्ट की धारा 25/27
4. खेजुरी PS केस नंबर 44/07 (30.07.2007): IPC की धारा 148/149 और आर्म्स एक्ट की धारा 25/35

पहले तीन मामलों में IPC के तहत हत्या से जुड़े आरोप शामिल हैं चौथा मामला हथियारों से जुड़े अपराधों का है। डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद चुनाव अधिकारियों ने पेंडिंग वारंट पर कार्रवाई की। अगर कार्रवाई पेंडिंग वारंट के आधार पर की गई थी, तो कांग्रेस असल तथ्यों पर बात किए बिना इसे राजनीतिक बदले की भावना कैसे कह सकती है? कानून का शासन सिर्फ इसलिए राजनीतिक बदला नहीं बन सकता क्योंकि यह कांग्रेस के उम्मीदवार पर लागू होता है। गुस्सा जाहिर करने से पहले तथ्यों का जवाब दें।"

रिलेटेड टॉपिक्स
Most Popular