प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द फ्यूचर ऑफ एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट डायनामिक्स पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि एवं NGT के चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द फ्यूचर ऑफ एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट डायनामिक्स पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित भी किया।

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Highlights

  • सोलर एनर्जी के जरिए भारत लगभग 20 करोड़ टन कार्बन एमिशन को रोकने में कामयाब रहा।
  • पेरिस COP21 के सभी वादे समय से पहले पूरे करने वाला G20 का इकलौता देश भारत।
  • नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत देश भर में 12.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 24,000 क्लस्टर गठित।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 'द फ्यूचर ऑफ एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट डायनामिक्स' पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा 19 और 20 सितंबर को दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के अलावा, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि एवं NGT के चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के मामले में भारत ने सदियों से दुनिया का मार्गदर्शन किया है। उसी वैचारिक कमिटमेंट को आगे बढ़ाते हुए और अपने समृद्ध सांस्कृतिक अनुभवों को आधार बनाकर, भारत अब जलवायु से जुड़ी आधुनिक चुनौतियों का समाधान दे रहा है। उन्होंने बताया कि अक्सर, कार्बन एमिशन की जिम्मेदारी गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाल दी जाती है। ग्लोबल साउथ से मेरे कई सहयोगी और दोस्त आज यहाँ मौजूद हैं। हालांकि ऐतिहासिक सच्चाई यह है की आज भी, प्रति व्यक्ति कार्बन एमिशन में भारत का योगदान ग्लोबल एवरेज के आधे से भी कम है।

उनके अनुसार आज का भारत पर्यावरण संरक्षण के अपने प्राचीन मूल्यों को आधुनिक विजन के साथ जोड़कर आगे बढ़ रहा है। पिछले 12 वर्षों में, भारत ने पर्यावरण से जुड़े हर क्षेत्र और सेक्टर में असाधारण प्रगति की है। हमारा मुख्य ध्यान रिन्यूएबल एनर्जी पर रहा है और इसने पर्यावरण की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। G20 देशों में भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने पेरिस COP21 समिट में किए गए सभी कमिटमेंट्स को तय समय से पहले ही पूरा कर लिया है। 12 साल पहले, भारत की सोलर एनर्जी कैपेसिटी लगभग 2 गीगावाट थी। आज यह 160 गीगावाट से ज्यादा हो गई है।

करोड़ों घरों तक LED बल्ब पहुंचाए गए है। इन कोशिशों के नतीजे आज हमारे सामने है। अकेले सोलर एनर्जी के जरिए, भारत लगभग 20 करोड़ टन कार्बन एमिशन को रोकने में कामयाब रहा है। सोलर एनर्जी के साथ-साथ भारत ने दूसरे क्लीन एनर्जी सेक्टर में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत कोयले के साफ-सुथरे इस्तेमाल के लिए कोल गैसीफिकेशन जैसी तकनीकों को भी बढ़ावा दे रहा है। आज भारत क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कुछ ही दिन पहले भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई थी और यह दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है।

प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि इसी महीने, कुछ दिन पहले, हमनें लगभग 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का लोकार्पण किया है। इस कॉरिडोर पर चलने वाली हर ट्रेन एक ही ट्रिप में सैकड़ों ट्रकों के बराबर माल एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाती है। डबल-स्टैक कंटेनर फ्रेट ट्रेनों का चलना अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इससे पर्यावरण को कितना बड़ा फायदा होता है। आज करोड़ों लोगों की भागीदारी से जल संरक्षण पर भी अभूतपूर्व काम हो रहा है।

देश भर में 70,000 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए है। कैच द रेन अभियान के तहत देश में लगभग 1.5 करोड़ वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स बनाए गए हैं, जिनसे वर्षा के जल का संरक्षण किया जा रहा है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत, आज देश में लगभग 12.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 24,000 क्लस्टर बनाए गए है। इसके अलावा, जलवायु के अनुकूल लगभग 3,000 किस्म की फसलें विकसित की गई हैं। एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देकर हम अपने कार्बन फुटप्रिंट को सक्रिय रूप से कम कर रहे है।

एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत देश भर में करोड़ों पेड़ लगाए गए है और यह मुहिम लगातार जारी है। प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए एक और बड़ी चुनौती रही है, जिसके चलते भारत ने सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया। रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल के मंत्र को अपनाते हुए, सर्कुलर इकोनॉमी को आगे बढ़ाया गया है। हमारी सांस्कृतिक विचारधारा कहती है, माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः। इसी विचारधारा को अपनाकर भारत एक रिस्पॉन्सिबल और सस्टेनेबल भविष्य बनाने की कोशिश कर रहा है।

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