भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि, "पश्चिम एशिया की स्थिति चिंताजनक है। पिछले 2-3 हफ्तों में, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सदन को स्थिति का पूरा ब्योरा दिया है। यह संघर्ष 3 हफ्तों से भी ज्यादा समय से चल रहा है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है, इसीलिए पूरी दुनिया सभी पक्षों से इस संघर्ष के जल्द समाधान की अपील कर रही है।"
उन्होंने कहा, "भारत के उन देशों के साथ व्यापक व्यापारिक संबंध हैं जो युद्ध की स्थिति में हैं या जो इस संघर्ष से प्रभावित हैं। जिस क्षेत्र में यह संघर्ष हो रहा है, वह दुनिया भर के अन्य देशों के साथ हमारे व्यापार के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है। विशेष रुप से हमारी कच्चे तेल और गैस की जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए। यह क्षेत्र हमारे लिए एक और कारण से भी महत्वपूर्ण है। खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते हैं और काम करते हैं। वहां कमर्शियल जहाज ऑपरेट होते हैं। भारतीय क्रू सदस्यों की संख्या भी बहुत अधिक है। इन विभिन्न कारणों से, भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। इसलिए, यह आवश्यक है कि इस संकट के संबंध में संसद की ओर से दुनिया तक एक एकजुट आवाज और आम सहमति पहुंचे।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, प्रभावित देशों में मौजूद हर भारतीय को सहायता प्रदान की गई है। मैंने ज्यादातर पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर दो राउंड्स की बातचीत की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। इस संघर्ष के दौरान, कुछ लोगों की जान चली गई है और कुछ घायल हुए हैं। प्रभावित देशों में हमारे मिशन लगातार भारतीयों की मदद करने में जुटे हुए हैं। चाहे वहां काम करने वाले भारतीय हों या वहां घूमने गए पर्यटक, सभी को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। हमारे मिशन नियमित रूप से एडवाइजरी जारी कर रहे हैं। भारत और अन्य प्रभावित देशों में 24/7 आउटरीच रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से, सभी प्रभावित लोगों को नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। संकट के समय में, भारत और विदेश में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने कहा, "जब से युद्ध शुरू हुआ है, 3,75,000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित रूप से भारत लौट आए हैं। अकेले ईरान से ही अब तक लगभग 1,000 भारतीय सुरक्षित लौटे हैं, जिनमें से 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस, फर्टिलाइजर्स और कई जरूरी चीजें आती हैं। जब से युद्ध शुरू हुआ है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बहुत मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद, हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई पर ज्यादा असर न पड़े। जैसा कि हम सभी जानते हैं, देश अपनी LPG की 60% जरूरत आयात से पूरी करता है। सप्लाई में अनिश्चितता के कारण, सरकार ने घरेलू LPG उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है। साथ ही, LPG का घरेलू उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। यह सुनिश्चित करने के लिए भी लगातार कोशिशें की जा रही हैं कि पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहे।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "पिछले एक दशक में, भारत ने संकट के समय के लिए कच्चे तेल के स्टोरेज को प्राथमिकता दी है। आज, भारत के पास 53 लाख मेट्रिक टन से अधिक का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मेट्रिक टन से अधिक का रिजर्व बनाने का काम चल रहा है। हमारी तेल कंपनियों के पास मौजूद रिजर्व इससे अलग हैं। पिछले 11 वर्षों में, हमारी रिफाइनिंग क्षमता में भी काफी वृद्धि हुई है। संकट के इस समय में, देश की एक और तैयारी बहुत काम आ रही है। पिछले 10-11 वर्षों में, इथेनॉल उत्पादन और ब्लेंडिंग पर अभूतपूर्व काम हुआ है। एक दशक पहले, देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग की क्षमता केवल एक प्रतिशत थी। आज, हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल करने के करीब हैं। इसकी वजह से, पिछले एक साल में हमें लगभग 4.5 करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ा है।"
उन्होंने कहा, "कमर्शियल जहाजों पर हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में रुकावटें अस्वीकार्य हैं। डिप्लोमेसी के माध्यम से, भारत युद्ध के इस माहौल में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। जब इस तरह के संकट आते हैं, तो कुछ तत्व इसका गलत लाभ उठाने की भी कोशिश करते हैं। इसलिए, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। चाहे वह तटीय सुरक्षा हो, सीमा सुरक्षा हो, साइबर सुरक्षा हो या फिर स्ट्रेटिजिक इंस्टॉलेशंस, सभी की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है। यदि देश की हर सरकार और हर नागरिक मिलकर आगे बढ़े, तो हम हर चुनौती पर विजय पा सकते हैं।"