प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने योग्यकार्ता में 9वीं सदी के प्रम्बानन मंदिर का दौरा किया। उन्होंने आज संयुक्त रूप से इस मंदिर के लिए भारत-इंडोनेशिया सहयोगात्मक सांस्कृतिक विरासत संरक्षण परियोजना (Collaborative Cultural Heritage Conservation) की पट्टिका का अनावरण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने X पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें कई लोग मंदिर में 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इस मौके पर उन्होंने कहा, "यह मेरा सद्भाग्य है कि मुझे हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का मौका मिल ही जाता है। मेरा जन्म वडनगर में हुआ था, जहाँ हाटकेश्वर महादेव मंदिर है। सोमनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से पहला है और गुजरात में स्थित है। इसके विकास की सीधी जिम्मेदारी मेरी है। मेरा राजनीतिक कार्य क्षेत्र काशी, जहां काशी विश्वनाथ महादेव के आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहे हैं। चाहे केदारनाथ या उज्जैन के महाकाल का पुनर्विकास हो, या यहाँ मेरा दौरा, जहाँ मुझे जीर्णोद्धार कार्य शुरू करने का मौका मिला, मैं इसे एक सौभाग्य मानता हूँ।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज उनकी यात्रा का तीसरा दिन है। यहाँ के लोगों के जीवन, बातचीत और यहाँ की हवा में भी संस्कृति की महक घुली-मिली है। कुछ ऐसा ही अनुभव हमें भारत की धरती पर हर पल होता है। हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत की यह महक स्वाभाविक रूप से अपनापन जगाती है। मैं यहाँ के लोगों का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने इतनी बड़ी विरासत को जिस प्रकार संभाला, संवारा और श्रद्धा भाव से ऐसा किया। मैं इंडोनेशिया के नागरिकों और यहाँ के सभी शासकों का भी ह्रदय से अभिनंदन करता हूँ। अगर मैं ल्हासा से कैलाश मानसरोवर यात्रा करता हूँ और आज इंडोनेशिया के इस मंदिर में आता हूँ, तो यहाँ भी मुझे 'महामृत्युंजय मंत्र' का वही गूँजता हुआ जाप सुनाई देता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे बताया कि आप दुनिया में कहीं भी चले जाएं, आपको भारत की सांस्कृतिक विरासत के दर्शन हो जाएंगे। साउथ-ईस्ट एशिया में हमारी विरासत की यह दूसरी सबसे बड़ी पहचान है। इस मंदिर में भगवान शिव, देवी दुर्गा और भगवान गणेश की मूर्तियां हैं। सदियों से इस मंदिर में पूजा-अर्चना होती रही है। आज मैंने भी इस मंदिर में दर्शन किए और पूजा-अर्चना करने का अवसर भी मिला। राष्ट्रपति ने मुझसे वादा लिया है कि हम इसे 2029 से पहले पूरा कर लेंगे और मुझे इसके लिए वापस आना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति सुबियांतो से वादा किया कि इसके पुनर्निर्माण के बाद वो निश्चित रूप से यहां आएंगे और उनके साथ इस उत्सव को मनाएंगे।