प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक का किया विमोचन

इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि प्रेम और स्नेह पर आधारित मानवीय संबंधों के संस्कार जो मेरे जीवन का आधार बने, वो मैने अपने गांव में ही सीखे। हमारा घर बहुत ही साधारण था। घास-फूस का बना हुआ। बरसात के दिनों में उसकी छत से पानी टपकने लगता था। मै और मेरे परिवार के लोग एक कोने में खड़े होकर बारिश रूकने का इंतजार करते थे। कई वर्षों बाद जब मै 2017 में राष्ट्रपति चुना गया, तो वो स्मृतियां मेरे मानस पटल पर लौट आईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक का किया विमोचन

इस कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पत्नी सविता कोविंद भी मौजूद थीं।

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Highlights

  • ओम बिरला ने कहा की कोविंद के शुरूआती जीवन में चुनौतियों के बावजूद मुश्किलों ने उनके संकल्प को कमजोर नहीं किया।
  • पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने बताया की मैं जीवन में जो कुछ भी बन पाया उसमें मेरे पिता का बहुत बड़ा योगदान है।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की बचपन के संघर्षों के बीच कोविंद जी ने शिक्षा को अपने सामर्थ्य को बढ़ाने का मार्ग बनाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा, "ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स" (Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles) का विमोचन किया। इस कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की पत्नी सविता कोविंद और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला समेत कुछ अन्य लोग भी उपस्थित थे। रामनाथ कोविंद, ओम बिरला और प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर अपने विचार भी रखे।

स्पीकर बिरला ने कहा कि कोविंद जी का जन्म एक साधारण और निर्धन परिवार में हुआ था। उनके शुरूआती जीवन में कई मुश्किलें और चुनौतियाँ थीं। स्कूल जाने के लिए भी उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। हालांकि, मुश्किलों ने कभी उनके संकल्प को कमजोर नहीं होने दिया। यह किताब उस असाधारण संकल्प की जीती-जागती तस्वीर है और हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने अपने भाषण में कहा कि आज इस मंच से आप सभी को संबोधित करना मेरे लिए बहुत ही भावुक पल है। आज तक मैंने आप सभी को कई मौकों पर संबोधित किया है, लेकिन आज का मौका मेरे लिए अलग है क्योंकि आज की चर्चा का विषय मेरी अपनी निजी जिंदगी, ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक : माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स का विमोचन है।

इसके विमोचन के मौके पर, मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए आप सभी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। मैं सोच रहा था कि आज मुझे क्या कहना चाहिए। मेरी आत्मकथा में सब कुछ पहले ही लिखा हुआ है। पढ़ने वाले पढ़ेंगे। फिर भी, इस मौके पर मेरे दिल में कुछ स्मृतियां हैं, जिन्हें मैं आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।

कोविंद ने कहा कि प्रेम और स्नेह पर आधारित मानवीय संबंधों के संस्कार जो मेरे जीवन का आधार बने, वो मैने अपने गांव में ही सीखे। हमारा घर बहुत ही साधारण था। घास-फूस का बना हुआ। बरसात के दिनों में उसकी छत से पानी टपकने लगता था। मै और मेरे परिवार के लोग एक कोने में खड़े होकर बारिश रूकने का इंतजार करते थे। कई वर्षों बाद जब मै 2017 में राष्ट्रपति चुना गया, तो वो स्मृतियां मेरे मानस पटल पर लौट आईं।

उन्होंने कहा कि मैं जीवन में जो कुछ भी बन पाया, उसमें मेरे पिता का बहुत बड़ा योगदान है। ईमानदारी, करूणा, उदारता और न्यायप्रियता के उनके संस्कार मेरे मन में अंकित हैं। मेरे पिता का शिक्षा के महत्व पर अटूट विश्वास था। उनका मानना ​​था कि शिक्षा असीमित संभावनाओं के द्वार खोलती है और जीवन में नई दिशाएँ व अनगिनत अवसर प्रदान करती है।​

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बचपन के संघर्षों के बीच, कोविंद जी ने शिक्षा को अपने सामर्थ्य को बढ़ाने का मार्ग बनाया। उन्होंने मेहनत की और संसाधनों की कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया। वे ऐसे मुकाम पर पहुँचे जिसकी उस समय के लोगों ने कल्पना भी नहीं की होगी। जब वे भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने, तो इतने ऊँचे पद पर पहुँचने के बावजूद कोविंद का विनम्र व्यक्तित्व और सादगी वैसी ही बनी रही। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि जब भी वे प्रधानमंत्री के तौर पर कोविंद जी से मिलने जाते थे, तो वे प्रोटोकॉल के हिसाब से जो काम नहीं करना चाहिए, करते थे।

वे प्रधानमंत्री को विदा करने के लिए कार के दरवाजे तक आते थे। शुरू में, मैं उनसे कहता था कि ऐसा न करें, फिर भी उन्होंने जीवन भर उस विनम्रता को नहीं छोड़ा। राष्ट्रपति बनने के बाद अपने गाँव लौटने पर, उन्होंने अपने शिक्षकों के पैर छुए और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। गाँव की मिट्टी को नमन करके उन्होंने गाँव के आम लोगों के प्रति अपना आभार प्रकट किया। पूरे देश ने उस भावुक दृश्य को देखा। ऐसे व्यवहार से उन्होंने दुनिया के सामने भारतीय मूल्यों की एक ऐसी छवि पेश की, जो हर भारतीय को गर्व से भर देती है।

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