राज्यसभा में मचा हंगामा, लेफ्ट सांसद जॉन ब्रिटास का आरोप, सुष्मिता देव ने उन्हें कहा लुंगी वाला

इस मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस सदन का प्रत्येक माननीय सदस्य बराबर है। हम सब समान रूप से भारतीय हैं। यदि आपको कोई आपत्ति है, तो आप उसे बाद में दर्ज करा सकते हैं। यदि कोई भी बात आपत्तिजनक है या देश के चरित्र और सदन की गरिमा के अनुकूल नहीं है, तो मैं माननीय सभापति से अनुरोध करना चाहूंगा कि वे संबंधित सदस्य को अपने कक्ष में बुलाकर चर्चा करें कि वास्तव में क्या हुआ था।

राज्यसभा में मचा हंगामा, लेफ्ट सांसद जॉन ब्रिटास का आरोप, सुष्मिता देव ने उन्हें कहा लुंगी वाला

डॉ. जॉन ब्रिटास ने कहा की मुझे मलयाली, दक्षिण भारतीय और भारतीय होने पर गर्व है।

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Highlights

  • डॉ. जॉन ब्रिटास ने इस टिप्पणी को लेकर सुष्मिता देव के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
  • उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सभी सदस्यों को सावधान रहने और साथी सांसदों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाने की सलाह दी।
  • जगत प्रकाश नड्डा ने कहा की हम हर राज्य के पारंपरिक पहनावे का सम्मान करते है और ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करते है।

राज्यसभा में उस समय हंगामा हो गया, जब केरलम के CPI(M) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने उन्हें 'लुंगी-वाला' कहकर संबोधित किया। बाद में मीडिया से बातचीत में, जॉन ने बताया कि उन्होंने सुष्मिता देव की इस आपत्तिजनक 'लुंगी-वाला' टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है।

यह बयान दक्षिण भारतीयों की गलत छवि बनाता है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह लोगों को अलग-थलग करने या भेदभाव करने का एक तरीका है। मुझे मलयाली होने, दक्षिण भारतीय होने और भारतीय होने पर गर्व है। हम इस देश की विविधता का जश्न मनाते हैं। उनके बयान एक सांसद के पद के अनुरूप नहीं हैं और मुझे विश्वास है कि माननीय सभापति और विशेषाधिकार समिति इस पर संज्ञान लेंगे।

सदन में, राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि उत्तर भारतीय या दक्षिण भारतीय जैसी कोई चीज नहीं होती, हम सभी भारतीय हैं। सदस्यों को सावधान रहने और साथी सांसदों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने से बचने की सलाह देते हुए, सभापति ने कहा कि हमारी संस्कृति अनूठी और सबको साथ लेकर चलने वाली है। 

इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस सदन का प्रत्येक माननीय सदस्य बराबर है। हम सब समान रूप से भारतीय हैं। यदि आपको कोई आपत्ति है, तो आप उसे बाद में दर्ज करा सकते हैं। यदि कोई भी बात आपत्तिजनक है या देश के चरित्र और सदन की गरिमा के अनुकूल नहीं है, तो मैं माननीय सभापति से अनुरोध करना चाहूंगा कि वे संबंधित सदस्य को अपने कक्ष में बुलाकर चर्चा करें कि वास्तव में क्या हुआ था।

इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, भाजपा के कुछ सांसदों ने कहा कि सुष्मिता देव को भी अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। सदन के नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा, हम यकीनन हर राज्य के पारंपरिक पहनावे का सम्मान करते हैं। हम इसे 'लुंगी' नहीं कहते, यह धोती है और हम इसका सम्मान करते हैं। हम ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करते। इस मामले में दूसरी पार्टियों के सांसदों ने भी कमेंट किया है।

तमिलनाडु से कांग्रेस सांसद क्रिस्टोफर तिलक ने कहा कि यह भाजपा की ओर से दक्षिण भारतीय संस्कृति का अपमान था। बात सिर्फ पहनावे की नहीं है। जॉन ब्रिटास जब अपना सवाल पूछ रहे थे, तो पश्चिम बंगाल के एक सदस्य ने अपमानजनक लहजे में उन्हें 'लुंगीवाला, लुंगीवाला' कहा। इतनी विविधता वाले देश में यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे साफ पता चलता है कि गैर-हिंदी भाषी इलाकों के प्रति भाजपा का रवैया कैसा है।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद हारिस बीरन ने कहा कि हम जानते हैं कि हमारा देश बहुत विविध है और विविधता ही भारत की पहचान है। लेकिन, जब इस तरफ बैठा कोई सदस्य दूसरी तरफ चला जाता है और अपनी सुविधा के हिसाब से किसी खास संस्कृति, उसके पहनावे और उससे जुड़ी हर चीज का अपमान करता है, तो क्या वही तय करेगा कि हमें क्या पहनना चाहिए?

इस बारे में आम राय यही होगी कि लोकसभा हो या राज्यसभा, सभी सांसदों को अपने शब्दों का चयन सावधानी से करना चाहिए। साथ ही, इस मुद्दे को उत्तर बनाम दक्षिण के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए हम सभी एक ही देश भारत के निवासी हैं।​

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