आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती है। इस मौके पर नई दिल्ली के जवाहर भवन में 'हरा भरा स्वराज: राजीव गांधी के विजन को एक श्रद्धांजलि' (Hara Bhara Swaraj: A tribute to Rajiv Gandhi's vision) नाम का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई अन्य लोग भी मौजूद थे। इस दौरान राहुल ने कहा कि स्वराज शब्द को अक्सर पश्चिमी शब्द फ्रीडम समझ लिया जाता है। लोग सोचते हैं कि स्वराज का मतलब आजादी या स्वतंत्रता है। लेकिन नहीं, स्वराज का मतलब है स्व (खुद) पर राज करना।
उदाहरण के लिए, अगर आप अमेरिका जाकर लोगों से पूछें, 'क्या ट्रंप एक आजाद इंसान हैं? तो हर कोई कहेगा, हाँ, बिल्कुल, वह आजाद हैं। लेकिन अगर आप पूछें, 'क्या ट्रंप का खुद पर शासन है?' तो आपको साफ जवाब मिलेगा नहीं, ऐसा नहीं है। अगर आप 70 या 80 साल पहले भारत की किसी जेल में जाकर, किसी कमरे में गांधी जी से पूछते, 'क्या आप आजाद हैं?' तो वह आपसे कहते, नहीं, मैं आजाद नहीं हूँ। मैं जेल में हूँ, मैं आजाद नहीं हूँ। लेकिन मै स्व पर राज करता हूँ। यही स्वराज है। इसलिए, इन दोनों शब्दों को एक-दूसरे से मिलाना नहीं चाहिए।
इस कार्यक्रम में राहुल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि RSS ने ये तय कर लिया है कि वो 1.5 अरब लोगों की सच्चाई जानता है। मैं कहता हूँ कि नहीं, सिर्फ 1.5 बिलियन लोग ही अपनी सच्चाई जान सकते हैं। यहां तक कि मै भी ऐसा नहीं कर सकता। अगर मै यह मानने लगूँ कि मै आपकी सच्चाई जानता हूँ, तो मै पागल हूँ। क्योंकि मैं आप नहीं हूँ। मैंने वे हालात नहीं देखे या झेले हैं जो आपने देखे या झेले हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आज, भारत में वैचारिक लड़ाई यही है। यह पर्यावरण, राजनीति या फ्री मीडिया वगैरह के बारे में नहीं है। ये सब तो ऊपरी बातें हैं। असली लड़ाई यह है कि लोगों के एक समूह ने अचानक यह तय कर लिया है, क्योंकि सिस्टम पर उनका कंट्रोल है, कि वे इस देश के हर व्यक्ति की सच्चाई जानते हैं। जब प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं, मैं छात्रों को माफ करता हूँ, तो इसका क्या मतलब है? मैं सब कुछ जानता हूँ। तुम कुछ नहीं जानते। फिर अचानक वे डर गए और मोहन भागवत जी ने कहा, नहीं, नहीं, हमें छात्रों पर हमला नहीं करना चाहिए। आप हर दिन छात्रों पर हमला कर रहे हैं क्योंकि आपको लगता है कि आप सच्चाई जानते हैं।
राहुल गांधी ने इस कार्यक्रम में गौतम अदाणी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर देश के हर बिजनेस पर किसी एक व्यक्ति का कंट्रोल हो, तो भारत के आम लोगों के लिए स्वराज की कोई गुंजाइश नहीं बचती। ऐसा नहीं होने दिया जा सकता। क्यों? क्योंकि इस कमरे में मौजूद आप में से कुछ लोगों के पास एयरपोर्ट्स, पोर्ट्स और कंपनियां होनी चाहिए। आपको सीमेंट कंपनियां चलानी चाहिए। ऐसे ब्यूरोक्रेट्स होने चाहिए जो खुलकर अपनी बात कह सकें और जिन्हें सिर्फ अदाणी के पैसे की वजह से उनकी मर्जी के मुताबिक काम करने के लिए मजबूर न किया जाए।
राहुल ने कहा कि गांधीजी का विजन कुछ बुनियादी चीजों के बिना मुमकिन नहीं है। यह ऐसे एजुकेशन सिस्टम के साथ मुमकिन नहीं है जो इतना महंगा हो। यह ऐसे टेस्टिंग सिस्टम के साथ मुमकिन नहीं है जो इतना अन्यायपूर्ण हो और यह ऐसे फाइनेंशियल सिस्टम के साथ मुमकिन नहीं है जिस पर दो-तीन लोगों का एकाधिकार हो।