मध्य प्रदेश में इस समय राजनीतिक हलचल काफी तेज बनी हुई है। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों को लेकर, सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इन चुनावों को देखते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस ने एक बड़ा फैसला किया है। पार्टी ने हॉर्स ट्रेडिंग के डर से अपने विधायकों को कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक भेजने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि इस कदम से कांग्रेस विधायक वोटिंग के दिन तक सुरक्षित रहेंगे और भाजपा की पहुंच से दूर रहेंगे। जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक जाने से पूर्व सभी कांग्रेस विधायक, विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) और गंधवानी से विधायक उमंग सिंघार के आवास पर इकट्ठा हुए। उमंग सिंघार ने विधायकों के साथ X पर एक फोटो भी पोस्ट की, जिसके साथ उन्होंने लिखा, "लड़ेंगे जीतेंगे।" तस्वीर में सभी विधायक भोपाल एयरपोर्ट के बाहर ही नजर आ रहे थे।
बताया जा रहा है कि, कांग्रेस विधायकों को भोपाल से बेंगलुरू ले जाने वाली पहली फ्लाइट, दोपहर 2.30 बजे रवाना होने वाली थी। वहीं दूसरी फ्लाइट शाम को प्रस्थान करने वाली थी। हालांकि ताजा खबरों के मुताबिक, अभी कुछ देर पहले ही नेताओं को उड़ान की परमिशन मिली है। इससे पूर्व, विधायकों के दूसरे राज्य जाने पर उमंग सिंघार ने कहा कि, "मुझे लगता है कि इससे काफी समय बाद विधायकों के साथ फिर से बैठने का मौका मिलेगा। कई भाजपा विधायक हमारे संपर्क में हैं, लेकिन हम पैसे की राजनीति में विश्वास नहीं करते हैं। आप हमारे 62 वोट देखेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग जा रहे हैं, वे बाहर जाकर सुरक्षित रहेंगे। सब एकजुट रहेंगे। सभी विधायकों की यही राय थी कि हमें साथ रहना चाहिए और एकजुट रहना चाहिए। जिस तरह से भाजपा पूरे देश में लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, वही काम यहां भी कर रही है।
मुरैना से कांग्रेस विधायक दिनेश गुर्जर ने भी इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि, "आप देख सकते हैं कि सभी कांग्रेस विधायक एकजुट हैं। भाजपा एक महिला, एक गरीब बेटी को हराने की कोशिश कर रही है और इसके खिलाफ सब एकजुट हैं।" मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। हालांकि जानकारी के मुताबिक, प्रभावी विधायकों की संख्या 228 है। यहां भाजपा के कुल 164 और कांग्रेस के 63 विधायक हैं। राज्यसभा की दो सीटें जीतने के लिए जरूरी 116 वोट उनके पास मौजूद है। वहीं भाजपा के तीसरे उम्मीदवार के लिए 48 वोट शेष हैं। तीसरी सीट जीतने के लिए उन्हें 10 और वोटों की जरूरत है। वहीं कांग्रेस के वोटों की संख्या 63 है और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के एकमात्र विधायक को मिलाकर ये आंकड़ा 64 वोटों तक पहुंच सकता है।
बची हुई सीट के लिए आवश्यक 58 वोट उनके पास मौजूद है। अगर इन सभी ने मीनाक्षी नटराजन को ही वोट दिया, तब तो कांग्रेस को कोई समस्या नहीं होगी। लेकिन अगर क्रॉस वोटिंग हुई तो ये तीसरी सीट भी भाजपा के ही खाते में जा सकती है। सभी विधायकों को कर्नाटक भेजने का यहीं कारण है कि मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार इस तरह के संकटों से निपटने में बड़े माहिर माने जाते हैं।