राजधानी दिल्ली आज से दो दिनों तक वैश्विक कूटनीति का मुख्य केंद्र बनी रहेगी। भारतीय संसद 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच (BRICS Parliamentary Forum) की मेजबानी कर रही है। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर में आए सभी ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने ब्रिक्स संसदीय मंच को संबोधित किया।
इसकी कुछ तस्वीरें X पर शेयर करते हुए बिरला ने लिखा, "संसद भवन परिसर स्थित ऐतिहासिक संविधान सदन में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। ब्रिक्स अपनी यात्रा के दो दशक पूरे कर रहा है। यह इस बात का सशक्त प्रमाण है कि कैसे विभिन्न राष्ट्र आम सहमति बनाकर, आपसी विश्वास को मजबूत करके और साझा वैश्विक आकांक्षाओं को आगे बढ़ाकर एक साथ काम कर सकते हैं।
दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला ब्रिक्स, लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने और संसदीय सहयोग को गहरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना' (Fostering Parliaments for People-Centric Development) विषय पर आधारित यह मंच, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और आज की गंभीर चुनौतियों का समाधान करने में संसदों की केंद्रीय भूमिका को फिर से रेखांकित करने का अवसर देता है।
रेजिलिएन्स, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी पर हमारी चर्चाओं में ऐसे रास्ते तलाशे जाएंगे, जिनसे संसदीय संस्थाएं अधिक प्रभावी, पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिकों के प्रति संवेदनशील बन सकें। युवाओं को सशक्त बनाना, उनकी आकांक्षाओं को अवसरों के साथ जोड़ना, विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना, तथा ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करना, ये हमारे सामूहिक प्रयासों के केंद्र में होने चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि यह मंच संसदीय साझेदारियों को गहरा करेगा, सार्थक संवाद को बढ़ावा देगा और एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी, शांतिपूर्ण तथा टिकाऊ दुनिया के हमारे साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगा।"
सभा को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि भारत की संसद के ऐतिहासिक संविधान सदन में ब्रिक्स संसदीय मंच के लिए आप सभी का यहाँ होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ब्रिक्स सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति और यहाँ बनी साझा प्रतिबद्धताएँ, निश्चित रूप से एक अनूठा और महत्वपूर्ण अनुभव होंगी। यहाँ हमारी सामूहिक भागीदारी, ब्रिक्स ढांचे के भीतर संसदीय सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
यह प्रतिबद्धता संवाद, आपसी सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों में साझा विश्वास पर आधारित है। इस वर्ष ब्रिक्स संसदीय मंच की 20वीं वर्षगांठ है। यह संगठन तेजी से विस्तार कर रहा है और वैश्विक घटनाक्रमों तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने की इसकी क्षमता लगातार बढ़ रही है। ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और पृथ्वी के लगभग एक-तिहाई भू-भाग पर फैले हुए हैं। इसके अलावा, वे वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह हमारी सामूहिक शक्ति और हमारी वैश्विक जिम्मेदारियों, दोनों को दर्शाता है। भले ही ब्रिक्स देश भूगोल, संस्कृति, भाषा और सामाजिक ढांचे के मामले में अलग-अलग हों, लेकिन हम अपने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के प्रति अपनी सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से एकजुट हैं।