असम से एक बड़ी अहम खबर सामने आई है। विधानसभा में आज यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश किया जा चुका है। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से, कैबिनेट मंत्री अतुल बोरा ने इस बिल को पेश किया। इस UCC बिल का उद्देश्य बहुविवाह पर रोक लगाना और शादी की न्यूनतम उम्र पुरुषों के लिए 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल तय करना है। इस बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता देने के लिए उनके रजिस्ट्रेशन का प्रस्ताव भी रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पहले ही इस बिल की घोषणा कर चुके थे। हालांकि विपक्षी विधायकों ने इस बिल का विरोध भी किया है।
UCC बिल पर असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के कार्यकारी अध्यक्ष, ज़ाकिर हुसैन सिकदर ने कहा, "हमने पहले ही पूछा था कि इसकी ज़रूरत क्यों है? असम की पार्टियों से सलाह ली जानी चाहिए थी, जो नहीं किया गया। UCC BJP का एक राजनीतिक एजेंडा है। इससे असम की जनता को क्या फायदा होगा?" कांग्रेस विधायक नुरुल हुदा ने कहा, "हम देखेंगे कि यह बिल क्या है और अगर यह धर्मों या इस्लाम के खिलाफ है, तो हम इसका विरोध करेंगे।" वहीं कांग्रेस विधायक एके रशीद आलम ने UCC पर कहा कि, "हमें देखना होगा कि इसमें क्या प्रावधान हैं, इसकी जरूरत है या नहीं, इसके क्या फायदे और नुकसान हैं।"
इस बहुत अहम बिल पर 27 मई को चर्चा और इसे पारित किए जाने की उम्मीद है। हालांकि असम सरकार के मुताबिक अनुसूचित जनजातियाँ-पहाड़ी (Scheduled Tribes-Hills) और अनुसूचित जनजातियाँ-मैदानी (Scheduled Tribes-Plains) प्रस्तावित कानून के दायरे से बाहर रहेंगी। पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाज, प्रथाएँ और अनुष्ठान भी UCC के प्रावधानों से मुक्त रहेंगे। ST-Plains में बोडो, रभा, कछारी और मिसिंग जैसी ट्राइब्स शामिल हैं, वहीं ST-Hills में कार्बी, दिमासा और हमर जैसी ट्राइब्स शामिल हैं। यदि ये बिल पास हो जाता है, जिसकी पूरी-पूरी संभावना है, तो उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम तीसरा राज्य होगा, जहां UCC लागू होगा।