अयोध्या के श्री राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का विवाद अभी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस मुद्दे ने राजनीतिक माहौल को भी गरमा दिया है। इसी बीच, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) ने आज आरोप लगाया है कि उनके अध्यक्ष और पूर्व विधायक अजय राय को एक होटल में नजरबंद कर दिया गया है। UPCC ने अपने X हैंडल पर एक वीडियो जारी करते हुए लिखा, "भाजपा सरकार का डर और कायरता पूरी तरह बेनकाब हो गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आज मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के दर्शन-पूजन के लिए अयोध्या जाने का कार्यक्रम पहले से प्रस्तावित था। जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय राय जी अयोध्या पहुंचे, इस डरपोक सरकार ने पुलिस का भारी पहरा लगाकर उन्हें होटल में ही नजरबंद कर दिया।"
उन्होंने आगे लिखा, "सच तो यह है कि अयोध्या में आस्था के नाम पर जो जमीन घोटाले हुए हैं, प्रभु के चरणों में चढ़ने वाले चढ़ावे की जो चोरी हुई है, यह सरकार उन पापों को छुपाना चाहती है। इन 'चढ़ावा चोरों' को डर है कि अगर सच्चे राम भक्त अयोध्या आएंगे, तो इनके भ्रष्टाचार की पोल पट्टी जनता के सामने खुल जाएगी। प्रभु के नाम पर अपनी राजनैतिक दुकान चलाने वालों, याद रखो! आस्था पर पहरा देने की यह दमनकारी और कायरतापूर्ण कोशिश कभी कामयाब नहीं होगी। श्री अजय राय जी की यह नजरबंदी इस बात का सबूत है कि सरकार के पैर उखड़ चुके हैं।"
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के इस उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में अजय राय के अलावा, किशोरी लाल शर्मा, तनुज पुनिया, उज्जवल रमण सिंह, राकेश राठौड़, ए. पी. गौतम, दीपक सिंह, वीरेंद्र चौधरी और मीता गौतम भी शामिल थे। खबरों की मानें तो, अजय राय के अलावा उज्जवल रमण सिंह को भी हाउस अरेस्ट किया गया है और ए. पी. गौतम के घर के बाहर भी पुलिस बल तैनात है। इसी बीच अजय राय का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने बताया कि, आज हम सभी भगवान श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन BJP सरकार ने हमें गिरफ्तार कर लिया है और आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में बंद कर दिया है। उन्होंने हमारे सभी साथियों को भी नजरबंद कर दिया है।
उन्होंने आगे बताया कि हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान राम BJP और RSS के लोगों को सद्बुद्धि दें, जो उनके नाम का इस्तेमाल करके सत्ता में आए हैं, ताकि वे इस पवित्र शहर में हो रहे घोटालों को रोक सकें। हमारी सामूहिक मांग है कि पुलिस रिमांड लेकर उन निचले स्तर के कर्मचारियों से पूछताछ करे जिन्हें जेल भेजा गया है। इसके अलावा, इसमें शामिल हाई-प्रोफाइल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए, जिनमें नृपेंद्र मिश्र, अनिल मिश्रा, गोपाल राय, चंपत राय, बंसल और गोविंद देव गिरी शामिल हैं। उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।