पश्चिम बंगाल के कोलकाता से एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर आज कोलकाता में पार्टी के एक दफ्तर को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस हमले को चौंकाने वाला और अस्वीकार्य बताया है। इसका एक वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि आज सुबह कैमक स्ट्रीट पर जो हुआ, वह कानून के राज पर एक शर्मनाक हमला है।
सुबह करीब 4.30 बजे, हथियारों से लैस बीजेपी के गुंडों ने कोलकाता के बीचों-बीच स्थित हमारे पार्टी ऑफिस पर धावा बोल दिया। उन्होंने हमारे लोगों पर हमला किया, उनके फोन छीन लिए, फर्नीचर तोड़ा, ऑफिस में तोड़-फोड़ की और इलेक्ट्रॉनिक सामान नष्ट कर दिया। कोलकाता पुलिस कहाँ थी? हमारे लोगों और वकीलों की ओर से बार-बार कॉल और ईमेल किए जाने के बावजूद, लगभग दो घंटे तक कोई जवाब नहीं मिला। यह बहुत ही निंदनीय और अस्वीकार्य है। हम इस हमले में शामिल हर व्यक्ति की तुरंत गिरफ्तारी की मांग करते हैं।
हम इस बात की भी जांच की मांग करते हैं कि इस हिंसा की योजना किसने बनाई, इसे किसने आयोजित और निर्देशित किया और बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने में क्यों नाकाम रही। कोई भी राजनीतिक पार्टी या हथियारों से लैस गुंडों का कोई भी समूह कानून से ऊपर नहीं हो सकता। अगर लोग सुबह 4.30 बजे हथियारों के साथ किसी राजनीतिक पार्टी के ऑफिस में घुस सकते हैं, लोगों पर हमला कर सकते हैं और संपत्ति में तोड़-फोड़ कर सकते हैं, जबकि पुलिस वहां मौजूद नहीं होती, तो पश्चिम बंगाल में कानून का राज आखिर बचा ही क्या है? अब बहुत हो चुका। दोषियों को गिरफ्तार करें। जवाबदेही तय करें। अभी कार्रवाई करें।
एक अन्य वीडियो साझा करते हुए उन्होंने पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल के राज्यपाल कोई कदम उठाएंगे? क्या केंद्रीय गृह मंत्री कोई कार्रवाई करेंगे? क्या PMO कोई एक्शन लेगा? या वे बस अनदेखा करते रहेंगे? उन्होंने लिखा कि अब समय आ गया है कि न्यायपालिका, खासकर कलकत्ता हाई कोर्ट, इस स्थिति का गंभीरता से संज्ञान ले और पश्चिम बंगाल में कानून का राज बनाए रखने के लिए कदम उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से एक सवाल किया कि आप TMC और मुझसे इतना क्यों डरते हैं कि आपको डराने-धमकाने के ऐसे हथकंडे अपनाने पड़ रहे हैं?
अभिषेक ने आगे लिखा कि पश्चिम बंगाल में विपक्ष के साथ हिंसा, तोड़-फोड़ और डराने-धमकाने के जरिए ऐसा ही बर्ताव किया जाना है, तो मुख्यमंत्री के पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। यह लोकतंत्र नहीं है। यह राजनीतिक गुंडागर्दी है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को शर्म आनी चाहिए। जो लोग चुप रहने का फैसला करते हैं, उन्हें भी शर्म आनी चाहिए। ऐसी हर हरकत याद रखी जाएगी। हर हमला, डराने-धमकाने की हर हरकत, सत्ता का हर दुरुपयोग। कुछ भी भुलाया नहीं जाएगा।