इस बार का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो चुका है, जो 13 अगस्त तक चलेगा। हालांकि इस सत्र में दोनों सदनों में, खासकर लोकसभा में बहुत ज्यादा कामकाज नहीं हो सका है। इसी संबंध में आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें पार्टी प्रवक्ता और पुरी से लोकसभा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने विपक्ष खासकर कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने कर्नाटक और झारखंड में हुए पेपर लीक का भी जिक्र किया।
संबित पात्रा ने संसद के मॉनसून सत्र के कामकाज के तरीके, खासकर कांग्रेस पार्टी और उसके कुछ सहयोगियों द्वारा इसमें डाली जा रही बाधाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, एक सत्र पर करोड़ों रूपए खर्च होते हैं। सांसद सवाल लेकर आते हैं। वे उन्हें उठाना चाहते हैं और मंत्रालयों से जवाब पाना चाहते हैं ताकि उनके क्षेत्रों का विकास हो सके। हालाँकि, जब से सत्र शुरू हुआ है, प्रश्नकाल नहीं हो पाया है और शून्यकाल के दौरान भी बाधाएँ डाली जा रही हैं। असल में, किसी भी बिल पर चर्चा नहीं हो रही है। संबित पात्रा ने कांग्रेस और INDI अलायंस के कुछ सहयोगियों के रवैये पर हैरानी जताई।
कर्नाटक में पेपर लीक की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब छात्रों ने कर्नाटक पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के खिलाफ विरोध किया और राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे से पूछा गया कि क्या वह इसकी जिम्मेदारी लेंगे, तो खरगे ने कहा कि छात्रों को पहले 25 दिनों तक भूख हड़ताल करनी चाहिए, जिसके बाद लाठीचार्ज का आदेश दिया जाएगा और उसके बाद ही वह इस्तीफे पर विचार करेंगे। फिर भी, राहुल गांधी इस मामले पर अब तक चुप हैं। आज भी, इस बात की संभावना है कि वह संसद को काम नहीं करने देंगे।
संबित ने झारखंड में पेपर लीक की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, झारखंड को देखिए। हजारों छात्र रोजाना सोशल मीडिया के जरिए विरोध कर रहे हैं और हम उनके आंदोलन को देख रहे हैं। फिर भी, कांग्रेस पार्टी ने इन विरोध करने वाले छात्रों के समर्थन में एक शब्द भी नहीं कहा है और न ही संसद में यह मुद्दा उठाया है। JPSC परीक्षा पेपर लीक को लेकर कांग्रेस का एक भी सांसद तख्ती लेकर खड़ा नहीं हुआ। किसी ने ऐसा नहीं किया, क्योंकि यह सिलेक्टिव आउटरेज का मामला है।
संबित ने पूर्णिया लोकसभा सांसद पप्पू यादव के उस विरोध प्रदर्शन का मुद्दा भी उठाया, जिसमें वे साधु के वेश में नजर आए थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष साधुओं और संतों को चोर बताकर उनका अपमान कर रहा है। उन्होंने कहा कि श्रावण के पवित्र महीने में, जब बहुत से लोग कांवड़ यात्रा कर रहे होते हैं, साधुओं को चोर के तौर पर दिखाया जा रहा है और उन्हें घसीटा जा रहा है। यह सब देश के लोकतांत्रिक मंदिर के परिसर में हो रहा है। एक साधु को घसीटना और उसे मारने की कोशिश करना यही सब हो रहा है।