बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत, ममता बनर्जी को हराकर मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे सुवेंदु अधिकारी

पिछले 5 सालों में सुवेंदु, जमीन पर भी कई मुद्दों पर संघर्ष करते हुए नजर आए हैं। इनमें 2021 के चुनावों के बाद हुई राजनीतिक हिंसा, संदेशखाली, अवैध घुसपैठ, हिंदुत्व और भ्रष्टाचार जैसे इश्यूज अहम रहे हैं।

बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत, ममता बनर्जी को हराकर मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे सुवेंदु अधिकारी

एक समय पर सुवेंदु को ममता का दाहिना हाथ माना जाता था।

Share:

Highlights

  • सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी का किला माने जाने वाली भवानीपुर सीट से उन्हें 15,105 वोटों से हरा दिया है।
  • ममता बनर्जी को 2011 में पहली बार जीत दिलाने में भी उनकी बड़ी प्रमुख भूमिका मानी जाती है।
  • 2021 में भाजपा द्वारा उन्हें विपक्ष का नेता चुना गया था और तब से उन्होंने TMC के खिलाफ आक्रामक रूख अपनाया है।

पश्चिम बंगाल में चुनावों के नतीजे सभी के सामने आ चुके हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 206 सीटें जीतीं, वहीं तृणमूल कांग्रेस की झोली में सिर्फ 81 सीटें ही आईं हैं। BJP की ओर से, प्रदेश में कई बड़े चेहरों को विजय मिली, तो TMC के भी कुछ पुराने नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन यदि किसी चुनावी जंग की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वो है निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की लड़ाई की। सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी का किला माने जाने वाली भवानीपुर सीट से उन्हें, 15,105 वोटों से हरा दिया है। इतना ही नहीं, सुवेंदु अपनी पुरानी नंदीग्राम सीट पर भी 9,665 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर चुके हैं। इस जीत के बाद उन्होंने बयान दिया कि अब ममता बनर्जी का राजनीतिक संन्यास हो गया है

हालांकि ये पहला मौका नहीं है, जब सुवेंदु ने ममता को हराया। इससे पूर्व 2021 में भी वो ममता बनर्जी को 1,956 वोटों के मामूली मार्जिन से पराजित कर चुके हैं। एक समय पर दोनों के बीच काफी अच्छे रिश्ते भी रहे हैं और सुवेंदु को ममता का दाहिना हाथ भी माना जाता था। आउटगोइंग सीएम ममता बनर्जी को 2011 में पहली बार जीत दिलाने में भी उनकी बड़ी प्रमुख भूमिका मानी जाती है। हालांकि उन्होंने 2020 में TMC छोड़ दी और BJP का दामन थाम लिया। माना जाता है कि वो TMC के वर्तमान राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की बढ़ती संगठनात्मक भूमिका से खुश नहीं थे, साथ ही वो खुद को पार्टी में हाशिए पर महसूस कर रहे थे।

2021 में BJP द्वारा उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया था और तब से ही उन्होंने TMC के खिलाफ आक्रामक रूख अपनाया है। पिछले 5 सालों में वो जमीन पर भी कई मुद्दों पर संघर्ष करते हुए नजर आए हैं। इनमें 2021 के चुनावों के बाद हुई राजनीतिक हिंसा, संदेशखाली, अवैध घुसपैठ, हिंदुत्व और भ्रष्टाचार जैसे इश्यूज अहम रहे हैं। 2026 में BJP के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद, ये कहा जा सकता है कि सुवेंदु एवं उनकी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं का 5 सालों का संघर्ष सफल रहा। इन चुनावों में मिली जीत के बाद, वो पश्चिम बंगाल में BJP के पहले मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके अलावा दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल जैसे नाम भी इस सूची में हैं। इन सब नेताओं में अब तक सुवेंदु ही सबसे अधिक अग्रेसिव नजर आए हैं।

यदि सुवेंदु अधिकारी के इतिहास पर नजर डालें, तो वो 2006 से 2009 और फिर 2016 से अब तक नंदीग्राम से विधायक हैं। 2026 में उन्होंने भवानीपुर और नंदीग्राम, दोनों सीटों पर जीत हासिल कर ही ली है। वो 2009 से 2016 तक तामलुक लोकसभा सीट से सांसद भी रहे हैं। उन्हें राज्य सरकार में मंत्रालयों का भी अनुभव है और उन्होंने पश्चिम बंगाल के परिवहन और पर्यावरण मंत्री के रूप में भी काम किया है। सुवेंदु 2020 से 2021 तक जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (JCI) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अब देखने वाली बात होगी कि क्या वो ही राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे या कोई नया ही चेहरा सामने आता है।

रिलेटेड टॉपिक्स