भारत की राजनीति में आज का दिन बेहद खास रहा। 16 से 19 अप्रैल तक तीन दिन के विशेष संसदीय सत्र की शुरुआत हो चुकी है। आज केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां) संशोधन बिल, 2026 और परिसीमन बिल, 2026 पेश किया। इसके अतिरिक्त केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 को लोकसभा में पेश किया।
इन सभी बिलों को पेश करने से पूर्व भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने X अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा, "आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।" हालांकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इन बिलों के विरोध में काले कपड़े पहने और नमक्क्ल में परिसीमन बिल की एक कॉपी जलाई। उन्होंने इसे काला कानून भी बताया। स्टालिन के बेटे और तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने भी परिसीमन बिल की एक कॉपी को जला दिया।
इन बिलों को पेश करने के लिए सदन में वोटिंग (डिवीजन) भी करानी पड़ी, जिसमें इसके पक्ष में 251 और विरोध में 185 वोट पड़े। इनका विरोध करते हुए लोकसभा सांसद और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ये बिल भारत के संघीय ढांचे पर हमला है। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए कहा, "मैं इस संवैधानिक संशोधन बिल को पेश किए जाने का विरोध करता हूँ, क्योंकि यह पार्लियामेंट्री फॉर्म ऑफ डेमोक्रेसी और संघवाद का उल्लंघन करता है। ये दोनों ही संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर का हिस्सा हैं। यह महिलाओं के आरक्षण का मामला नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण पर शासन करना और लेजिस्लेचर से OBCs के प्रतिनिधित्व को पूरी तरह से समाप्त कर देना है।"
स्पीकर ओम बिरला ने जानकारी देते हुए कहा कि इन तीन अहम विधेयकों को पारित करने के लिए मतदान 17 अप्रैल को शाम 4 बजे होगा। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में पेश किए गए बिलों पर बताया कि संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 महिलाओं के लिए समानता सुनिश्चित करेगा। महिलाओं के लिए आरक्षण के पक्ष में बात करते हुए, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का हवाला देते हुए मेघवाल ने कहा, "मैं किसी भी समुदाय की प्रगति को इस बात से मापता हूँ कि उस समुदाय की महिलाओं ने कितनी प्रगति की है।"
इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं के लिए कोटे के मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों का भी ज़िक्र किया। केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा, "निश्चित रूप से 33% सीटों का आरक्षण लागू होगा। यह केवल समय की बात है," कलाम ने तब यही कहा था और अब वह समय आ गया है।" उन्होंने इस "ऐतिहासिक कदम" को उठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की।
विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि, "गृह मंत्री अमित शाह 2023 में भी महिला आरक्षण पर चर्चा लाए थे। तो फिर आज इसे इस तरह क्यों पेश किया जा रहा है, जैसे यह कोई बिल्कुल नया विचार हो और कोई ऐतिहासिक पल हो?" "हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं। लेकिन हम चाहते हैं कि इसे आसान बनाया जाए और परिसीमन से न जोड़ा जाए। लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही आरक्षण लागू किया जाए। आप इन दोनों को इसलिए जोड़ रहे हैं ताकि महिला आरक्षण में देरी हो। अगर आपने 2023 में हमारी बात सुनी होती, तो महिला आरक्षण 2024 में ही लागू हो गया होता।"
इसके अलावा गौरव गोगोई ने कहा कि इस समय इन बिलों को पेश करना ये दिखाता है कि सरकार जाति जनगणना के खिलाफ है। उन्होंने कहा, "आप 33% आरक्षण लाने के लिए परिसीमन को जबरदस्ती आगे बढ़ा रहे हैं।" उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि, "सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का ये आंकड़ा कहा से आया? बिना जनगणना या किसी भी संबंधित संसदीय दस्तावेज़ के यह आंकड़ा कैसे आ सकता है?"