धनतेरस का त्योहार दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत माना जाता है। यह पर्व उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की मंगलकामना का प्रतीक है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। भगवान धन्वंतरि को आरोग्य और स्वास्थ्य का देवता, माता लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी, जबकि भगवान कुबेर को धन का संरक्षक और आर्थिक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही धनतेरस की शाम मृत्यु के देवता यमराज की पूजा और यमदीपदान करने की भी परंपरा है।
भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने से जुड़ी मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें भगवान विष्णु का अंशावतार तथा आयुर्वेद और चिकित्सा का जनक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि इस दिन अपने हाथों में पीतल का कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।
माता लक्ष्मी से जुड़ी प्रचलित कथा
धनतेरस के शुभ दिन से जुड़ी माता लक्ष्मी की एक कथा भी काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार श्राप के कारण माता लक्ष्मी को 12 वर्षों तक एक गरीब किसान के घर रहना पड़ा था। माता लक्ष्मी की उपस्थिति से किसान के घर में सुख-समृद्धि बढ़ने लगी। जब 12 वर्षों की अवधि पूरी हुई और माता लक्ष्मी वापस वैकुंठ लोक जाने लगीं, तो किसान ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। तब माता लक्ष्मी ने उससे कहा कि यदि वह धनतेरस के दिन उनका पूजन करे और दीप जलाए, तो वे सदैव उसके घर में निवास करेंगी।
यमदीपदान की परंपरा और राजा हीमा की कथा
एक अन्य लोककथा के अनुसार, राजा हीमा के पुत्र की कुंडली में विवाह के तीन दिन बाद सांप के काटने से मृत्यु होने का योग था। कथा के मुताबिक, राजकुमार की पत्नी ने यमराज के सामने दीपक जलाकर अपने पति की जान बचाई थी। तभी से धनतेरस पर यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा शुरू हुई।
धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त एक बड़ा दीपक (यमदीप) जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार अकाल मृत्यु के भय से मुक्त रहता है।
धनतेरस पर खरीदारी का विशेष महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। ऐसे में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
इस दिन सोना, चांदी, नए बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक होती है।