UCC पर अमित शाह के ऐलान के बाद NDA सहयोगियों की अलग-अलग राय, TDP करती दिख रही समर्थन

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के पूर्व अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ऐसे कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहाँ BJP की सरकार नहीं है और UCC के बारे में फैसला पूरे देश को संसद के जरिए करना चाहिए। सिर्फ BJP वाले राज्यों में इसे लागू करके आप इसे 'यूनिवर्सल' नहीं कह सकते।

UCC पर अमित शाह के ऐलान के बाद NDA सहयोगियों की अलग-अलग राय, TDP करती दिख रही समर्थन

2029 से पहले BJP-NDA के 21 राज्यों में UCC : अमित शाह।

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Highlights

  • JD-U के संजय झा ने UCC को लेकर अमित शाह से मुलाकात की बात कही।
  • चिराग पासवान ने ड्राफ्ट सार्वजनिक कर व्यापक विचार-विमर्श की मांग की है।
  • शिवसेना ने पूरे देश में UCC लागू करने के बयान का समर्थन किया।

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दो दिन पहले एक अहम घोषणा की है। मुंबई में सेवा संकल्प अभियान पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी-राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (BJP-NDA) की सरकार वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू किया जाएगा। उनके इस ऐलान के बाद विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रहीं हैं। जहां एक तरफ विपक्षी दल इस पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं NDA के घटक दल भी इस पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। जनता दल-यूनाइटेड (JD-U) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि वह UCC के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे।

दूसरी तरफ बिहार के उपमुख्यमंत्री और JD-U के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने भी बताया कि सबसे पहले तो हमें यह देखना होगा कि UCC बिल किस रूप में पेश किया जाता है। दूसरी बात, हमारे राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पहले ही कह चुके हैं कि प्रावधानों की समीक्षा के बाद गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत होगी और उसके बाद हमारी पार्टी की बैठक होगी। पार्टी के भीतर विचार-विमर्श होगा और उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। अगर हमें कोई चिंता हुई या कोई मुद्दा दिखा, तो हम गृह मंत्री से उन पर ध्यान देने का अनुरोध करेंगे।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के पूर्व अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ऐसे कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहाँ BJP की सरकार नहीं है और UCC के बारे में फैसला पूरे देश को संसद के जरिए करना चाहिए। सिर्फ BJP वाले राज्यों में इसे लागू करके आप इसे 'यूनिवर्सल' नहीं कह सकते।

लोक जनशक्ति पार्टी-राम विलास (LJP-RV) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने X पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि, "भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है - पाँचवीं-छठी अनुसूची, अनुच्छेद 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है। मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता - दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो - तत्पश्चात अवलोकन उपरांत पार्टी अपना मत रखेगी।"

वहीं शिवसेना (SS) के प्रवक्ता संजय निरुपम ने बताया कि शिवसेना गृहमंत्री जी के बयान का पूरा समर्थन करती है। हम चाहते हैं कि कॉमन सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता पूरे देश में हो। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रदेश अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने कहा कि, "मैंने गृह मंत्री का बयान देखा है। जाहिर है, UCC के मामले में हम अपने NDA सहयोगियों के साथ खड़े रहेंगे। UCC के आलोचक भी हैं और समर्थक भी। आलोचकों का कहना है कि इससे धार्मिक आजादी का उल्लंघन होता है, जबकि समर्थकों का कहना है कि इससे देश की एकता मजबूत होती है। इसलिए, NDA सहयोगी होने के नाते, हम गृह मंत्री के बयान का ही समर्थन करेंगे।"

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