तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सनातन धर्म का मुद्दा गर्मा गया है। प्रदेश में वर्तमान विपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म के उन्मूलन की बात कही है। उन्होंने कहा, "सनातन, जिसने लोगों को बाँटा, उसे मिटा देना चाहिए।" उदयनिधि ने राष्ट्रीय गीत (National Song) वंदे मातरम पर भी आपत्ति जताई और कहा, "पश्चिम बंगाल के CM के शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम नहीं बजाया गया था। जबकि यहां इसे बजाया गया। आप सभी जानते हैं कि वहां के राज्यपाल कौन हैं। सरकार को दोबारा ऐसा नहीं होने देना चाहिए। हमारे तमिलनाडु के राज्य गीत को कभी भी दूसरे स्थान पर नहीं धकेला जाना चाहिए।" एक और विचित्र बात यह भी रही कि इस बयान पर तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की ओर से कोई रिएक्शन सामने नहीं आया।
सोशल मीडिया पर उदयनिधि की इस हरकत की बहुत आलोचना हो रही है। BJP के प्रवक्ता सी. आर. केशवन ने X पर एक पोस्ट में लिखा, "उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के राहुल गांधी हैं, जो विभाजनकारी और नफरत भरी राजनीति फैला रहे हैं। राहुल गांधी ने पवित्र सेंगोल का मजाक उड़ाया था और उन्होंने राम मंदिर की 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह का अपमान किया और उसका बहिष्कार किया। राहुल गांधी की तरह, जिन्हें पिछले तीन लोकसभा चुनावों में जनता ने नकार दिया है, उदयनिधि स्टालिन भी, तमिलनाडु की जनता द्वारा दंडित किए जाने और सत्ता से बाहर किए जाने के बावजूद, अपनी जहरीली बयानबाजी जारी रखे हुए हैं। आप विभाजनकारी DMK से और क्या उम्मीद कर सकते हैं?"
उन्होंने आगे लिखा, "यह वही पार्टी है जिसने 'कार्तिकई दीपम' जलाने का विरोध किया था और जिसके मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु की जनता को दीपावली की शुभकामनाएं तक नहीं दीं। DMK के एक सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तो बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया था कि हिंदू धर्म न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक खतरा है। इन आदतन अपराधियों को यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि तमिलनाडु के स्टेट एंब्लम में एक मंदिर का गोपुरम अंकित है और तमिलनाडु की जनता अपने धर्म और अपनी भावनाओं के इस तरह के खुलेआम अपमान और तिरस्कार को न तो कभी भूलेगी और न ही कभी माफ करेगी।"
तमिलनाडु में BJP नेता विनोज पी. सेल्वम ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "उदयनिधि के इन भाषणों की वजह से, तमिलनाडु से DMK का ही सफाया हो गया। सनातन धर्म और उसके मूल्य इस धरती पर तब तक जीवित रहेंगे, जब तक आखिरी इंसान की सांसें चल रही हैं। ये पहली बार नहीं है, जब उदयनिधि ने इस तरह का विवादित बयान दिया है। 2023 में एक कांफ्रेंस के दौरान, उन्होंने सनातन धर्म की तुलना "डेंगू" और "मलेरिया" से की थी और कहा था कि इसका न केवल विरोध किया जाना चाहिए, बल्कि इसे खत्म कर दिया जाना चाहिए। प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री से पुनः इस तरह का कमेंट आना वाकई में बेहद शर्मनाक है।