प्रधानमंत्री मोदी सोमनाथ अमृत महोत्सव में हुए शामिल, महापूजा, कुम्भाभिषेक और ध्वजारोहण समारोह में लिया हिस्सा

11 मई के ही दिन, साल 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह सम्पन्न कर सोमनाथ मंदिर को भक्तों के लिए दर्शन हेतु खोला था।

प्रधानमंत्री मोदी सोमनाथ अमृत महोत्सव में हुए शामिल, महापूजा, कुम्भाभिषेक और ध्वजारोहण समारोह में लिया हिस्सा

प्रधानमंत्री मोदी भगवान सोमनाथ की साधना में लीन नजर आए।

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Highlights

  • सोमनाथ अमृत महोत्सव इस मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद इसके उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने आज त्रिवेणी हेलिपैड से वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक एक रोड-शो भी किया।
  • IAF द्वारा सूर्यकिरण एयर शो आयोजित किया गया और हेलीकॉप्टर ने मंदिर के शिखर पर फूल बरसाए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10-11 मई को गुजरात के दो-दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने यहां अत्यंत पावन श्री सोमनाथ मंदिर में 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' में हिस्सा लिया। श्री सोमनाथ मंदिर हमारे 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भारत की अटूट आस्था तथा सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है। सोमनाथ अमृत महोत्सव इस मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद इसके उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। 11 मई के ही दिन, साल 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह सम्पन्न कर इस मंदिर को भक्तों के लिए दर्शन हेतु खोला था। प्रधानमंत्री मोदी आज मंदिर में एक विशेष महापूजा में भी शामिल हुए। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण समारोह में भी हिस्सा लिया।

पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार, 11 तीर्थ स्थलों से लाए गए पवित्र जल से मंदिर के शिखर पर कुंभाभिषेक किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिवेणी हेलिपैड से वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक एक रोड-शो भी किया, जिस दौरान उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उपस्थित थे। भारतीय वायु सेना (IAF) द्वारा 'सूर्यकिरण एयर शो' आयोजित किया गया और हेलीकॉप्टर ने मंदिर के शिखर पर फूलों की पंखुड़ियाँ बरसाईं। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। इससे पूर्व प्रधानमंत्री मोदी एक ऑप-एड भी लिख चुके हैं, जिसमें उन्होंने उन सभी विभूतियों का स्मरण किया, जिन्होंने महमूद गजनवी, उलूग ​खान और जफर खान जैसे आक्रांताओं द्वारा कई हमलों के बाद, इस मंदिर के रक्षण और पुनर्निर्माण आदि में अपना अमूल्य योगदान दिया।

इनमें चक्रवर्ती महाराज धारसेन चतुर्थ, भीम प्रथम, जयपाल, आनंदपाल, कर्णदेव सोलंकी, जयसिंह सिद्धराज, महिपाल चूड़ासमा, राव खंगार चूड़ासमा और पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई होळकर शामिल हैं। उन्होंने वीर हमीरजी गोहिल और वीर वेगड़ाजी भील का भी उल्लेख किया। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एक जनसभा को भी संबोधित किया जाएगा। साथ ही आज एक विशेष स्मारक डाक टिकट और 75 रूपए का एक विशेष स्मारक सिक्का भी जारी किया जाएगा।

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