पश्चिम बंगाल की राजनीति से वही खबर सामने आई, जिसका पहले से अंदेशा लगाया जा रहा था। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से इस्तीफा दे चुके तीन राज्यसभा सांसद, सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन कर ली है। तीनों ने BJP के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इतना ही नहीं, BJP ने पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की तीन खाली सीटों के उपचुनाव के लिए भी उन्हें उम्मीदवार घोषित किया है। इन तीनों नेताओं के इस्तीफे के कारण ही उपचुनाव की नौबत आई। इस पर TMC के नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है।
ममता गुट के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि, सुखेंदु शेखर रॉय 2011 से पहले कभी MLA या MP नहीं रहे थे। ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर सम्मान दिया और दोबारा नॉमिनेट भी किया। अब वे BJP में शामिल हो गए। क्या ममता बनर्जी इसी व्यवहार की हकदार थीं? सिर्फ इसलिए कि कोई पार्टी कुछ समय विपक्ष में रहती है, क्या वरिष्ठ नेताओं के लिए यह कहना सही है कि यह बुरा है या वह बुरा है? जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं, तब तो वे पार्टी छोड़कर नहीं गए। जनता यह सब देख रही है, जनता सब कुछ देखती है।
लोकसभा सांसद सौगत रॉय को भी इस घटनाक्रम पर हैरानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है। वे पहले से ही उस तरफ थे। BJP ने अब उनकी सीटें पक्की करने के लिए उन्हें नॉमिनेशन दिया है। इससे हमें कोई नुकसान नहीं होगा, मुझे शक है कि BJP को भी इससे कोई फायदा होगा। दल बदलने वालों का कोई खास महत्व नहीं होता है।
विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने बताया कि सुखेंदु के साथ मेरा पुराना रिश्ता है। वे एक सीनियर नेता हैं और उन्होंने अक्सर मेरा मार्गदर्शन किया है। सुष्मिता मेरी दोस्त हैं, हम दोनों 2014 में सांसद बने थे। प्रकाश मेरे छोटे भाई जैसे हैं। अगर वे कोई निजी फैसला लेते हैं, तो इसमें मेरा कोई दखल नहीं है। राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन निजी रिश्ते बने रहते हैं। लोकतंत्र में उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है। इन तीनों के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं। हो सकता है कि वे मेरे विचारों के उलट किसी राजनीतिक रुख को अपना लें, लेकिन हमारा निजी रिश्ता निश्चित रूप से बना रहेगा।
पार्टी में शामिल होने के बाद सुष्मिता देव ने कहा कि अगर आप संगठन के प्रति समर्पित हैं और लोगों के लिए काम करना चाहते हैं, तो BJP एक ऐसी पार्टी है जो मेरिट के आधार पर काम करती है, न कि भाई-भतीजावाद, किचन कैबिनेट या गुटबाजी के आधार पर। आप INDI अलायंस या किसी भी दूसरी पार्टी को देखें, वहां सब कुछ 'किचन कैबिनेट' के इर्द-गिर्द ही घूमता है। वहीं प्रकाश चिक बड़ाईक ने कहा कि वो अपने क्षेत्र में विकास के लिए BJP में शामिल हुए हैं।
सुखेंदु शेखर ने भी BJP में शामिल होने के अपने फैसले के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मै लंबे समय से अपना पॉलिटिकल स्टैंड बदलने के लिए सही पल का इंतजार कर रहा था। मैं पिछले 59 सालों से राजनीति में हूँ। मैंने CPI(M) और नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। लेकिन सच तो यह है कि पिछले 50 सालों से मैं गुंडों की पार्टी के साथ जुड़ा हुआ था। आखिरकार, मुझे यकीन हो गया कि मुझे इस पार्टी के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहिए। R.G. कर घटना के दौरान, मैंने अपना रूख साफ कर दिया था।
उसके बाद, मुझ पर भारी दबाव डाला गया और धमकी भरे फोन कॉल आए, जिनमें यह धमकी भी शामिल थी कि मेरी बेटी को किडनैप किया जा सकता है। मुझे यकीन था कि यह सरकार गिर जाएगी और पार्टी खत्म हो जाएगी। मेरे आकलन के मुताबिक, पार्टी अब खत्म हो चुकी है और सरकार पहले ही गिर चुकी है।