उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का 91 वर्ष की आयु में निधन, लंबे समय से थे अस्वस्थ

बीसी खंडूरी ने दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली है। उन्होंने मार्च 2007 से जून 2009 तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। दोनों ही बार वो धुमाकोट विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। वर्तमान में उनकी बेटी ऋतु खंडूरी भूषण राजनीति में सक्रिय है और उत्तराखंड के विधानसभा अध्यक्ष के पद पर कार्यरत है। वहीं उनके दामाद राजेश भूषण इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) 1987 बैच के बिहार कैडर के एक रिटायर्ड अधिकारी हैं।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का 91 वर्ष की आयु में निधन, लंबे समय से थे अस्वस्थ

बीसी खंडूरी राज्य और राष्ट्रीय, दोनों ही स्तरों पर BJP के दिग्गज नेताओं में से एक रहे है।

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Highlights

  • बीसी खंडूरी 18 वर्षों तक गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद थे।
  • उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।
  • खंडूरी ने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की सरकार में सड़क और परिवहन मंत्री के तौर पर भी काम किया था।

उत्तराखंड की राजनीति से एक दुःखद खबर सामने आई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रि.) भुवन चंद्र खंडूरी (बीसी खंडूरी) का 91 साल की आयु में निधन हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री लंबे समय से अस्वस्थ थे और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे। उनके बेटे मनीष खंडूरी ने बताया कि वो देहरादून के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज करवा रहे थे, जहां आज सुबह उनकी दुःखद मृत्यु हो गई।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने X पर शोक प्रकट करते हुए लिखा, "उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। श्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

उन्होंने आगे लिखा, "सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा। राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। एक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।"

बता दें कि खंडूरी राज्य और राष्ट्रीय, दोनों ही स्तरों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेताओं में से एक रहे हैं। उन्होंने 1954 से 1991 तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं और मेजर जनरल के पद पर रिटायर हुए। अपने सैन्य करियर में उन्होंने सेना मुख्यालय में एडिशनल मिलिट्री सेक्रेट्री और इंजीनियर-इन-चीफ डिवीजन में एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) के तौर पर भी काम किया। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से भी नवाजा गया था। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने पॉलिटिक्स में कदम रखा।

पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी ने पहली बार 1991 में, गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर पार्लियामेंट में कदम रखा था। बाद में 1998 से 2007 और 2014 से 2019 तक भी उन्होंने इस सीट से विजय प्राप्त की थी। वो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री के तौर पर भी काम कर चुके थे। मंत्री के तौर पर उन्होंने BJP के नेशनल हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लागू किया था।

खंडूरी ने दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी भी संभाली थी। उन्होंने मार्च 2007 से जून 2009 तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। दोनों ही बार वो धुमाकोट विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। वर्तमान में उनकी बेटी ऋतु खंडूरी भूषण राजनीति में सक्रिय है और उत्तराखंड के विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) के पद पर कार्यरत है। वहीं उनके दामाद राजेश भूषण इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) 1987 बैच के बिहार कैडर के एक रिटायर्ड अधिकारी हैं।

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